📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Embassy of India, Lisbon, Portugal
अपराध
जबलपुर के वाणिज्यिक कर अधिकारी मनीष कुमार जैन की आय से 3.94 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति, लोकायुक्त जांच जारी
✍️ Amar Ujala · Jabalpur
🗓 29 अक्टू. 2026, 04:01 PM
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लोकायुक्त जांच में पता चला है कि वाणिज्यिक कर अधिकारी मनीष कुमार जैन की आय से 3.94 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति है। छापेमारी के बाद टीम उनके बैंक खाते, लॉकर और परिजनों की संपत्तियों की जांच कर रही है।
मध्य प्रदेश के लोकायुक्त जांचकर्ताओं ने उजागर किया है कि जबलपुर में तैनात वाणिज्यिक कर अधिकारी मनीष कुमार जैन की आय से 3.94 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। यह अंतर उनके वित्तीय विवरणों की नियमित जाँच के दौरान सामने आया।
प्रारम्भिक जानकारी मिलने के बाद एक विशेष टीम ने जैन के घर और कार्यालय में छापेमारी की, दस्तावेज़ जब्त किए और उनके बैंक खातों व लॉकरों तक पहुँच हासिल की। टीम ने उनके निकटतम परिजनों की संपत्तियों की भी जाँच शुरू कर दी है ताकि यह पता चल सके कि अतिरिक्त धन का स्रोत वैध है या नहीं।
अधिकारी ने कहा है कि जांच का मुख्य उद्देश्य अनजाने में प्राप्त संपत्ति के स्रोतों को उजागर करना है, जिसमें किसी भी प्रकार के दुरुपयोग या भ्रष्टाचार के संकेत शामिल हो सकते हैं। यदि जांच में गलत कार्य सिद्ध होते हैं, तो अधिकारी के खिलाफ राज्य के भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला राज्य के राजस्व विभागों में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लोकायुक्त के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है और यह संदेश देता है कि सार्वजनिक सेवकों की वित्तीय स्थिति पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
प्रारम्भिक जानकारी मिलने के बाद एक विशेष टीम ने जैन के घर और कार्यालय में छापेमारी की, दस्तावेज़ जब्त किए और उनके बैंक खातों व लॉकरों तक पहुँच हासिल की। टीम ने उनके निकटतम परिजनों की संपत्तियों की भी जाँच शुरू कर दी है ताकि यह पता चल सके कि अतिरिक्त धन का स्रोत वैध है या नहीं।
अधिकारी ने कहा है कि जांच का मुख्य उद्देश्य अनजाने में प्राप्त संपत्ति के स्रोतों को उजागर करना है, जिसमें किसी भी प्रकार के दुरुपयोग या भ्रष्टाचार के संकेत शामिल हो सकते हैं। यदि जांच में गलत कार्य सिद्ध होते हैं, तो अधिकारी के खिलाफ राज्य के भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला राज्य के राजस्व विभागों में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लोकायुक्त के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है और यह संदेश देता है कि सार्वजनिक सेवकों की वित्तीय स्थिति पर कड़ी नजर रखी जाएगी।