📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rohitmahali01
राजनीति
पूर्व मुख्यमंत्री का कहना, नया खनन अधिनियम झारखंड व राष्ट्र के लिए फायदेमंद
✍️ Construction World
🗓 31 अग. 2026, 03:33 PM
👁 33
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने नए खनन अधिनियम को सराहा, कहा यह राज्य और देश दोनों के लिए आर्थिक लाभ लाएगा।
नए खनन अधिनियम को इस सप्ताह पेश किया गया और इसे भारत के खनन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार बताया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कानून लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाता है, पर्यावरणीय सुरक्षा को सुदृढ़ करता है और स्थानीय विकास के लिए राजस्व‑साझाकरण की व्यवस्था करता है।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने Construction World को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह अधिनियम खनिज‑समृद्ध प्रदेशों को निवेश आकर्षित करके और रोजगार सृजन करके सीधे लाभान्वित करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ी हुई उत्पादन और अधिक कर राजस्व के माध्यम से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।
विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड, जो कोयला और धातु अयस्क का बड़ा योगदानकर्ता है, अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन से बुनियादी ढाँचे के प्रोजेक्ट्स में तेज़ी देख सकता है। सरकार ने कहा है कि खनन रॉयल्टी का एक हिस्सा सामुदायिक कल्याण योजनाओं के लिए आवंटित किया जाएगा।
यह बयान भारत में संसाधन प्रबंधन को लेकर चल रही बहस के बीच आया है, जहाँ कई राज्यों ने अधिक वित्तीय स्वायत्तता की माँग की है। नया खनन अधिनियम इस महीने के अंत में अंतिम अनुमोदन के लिए संसद में पेश किया जाएगा।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने Construction World को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह अधिनियम खनिज‑समृद्ध प्रदेशों को निवेश आकर्षित करके और रोजगार सृजन करके सीधे लाभान्वित करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ी हुई उत्पादन और अधिक कर राजस्व के माध्यम से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।
विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड, जो कोयला और धातु अयस्क का बड़ा योगदानकर्ता है, अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन से बुनियादी ढाँचे के प्रोजेक्ट्स में तेज़ी देख सकता है। सरकार ने कहा है कि खनन रॉयल्टी का एक हिस्सा सामुदायिक कल्याण योजनाओं के लिए आवंटित किया जाएगा।
यह बयान भारत में संसाधन प्रबंधन को लेकर चल रही बहस के बीच आया है, जहाँ कई राज्यों ने अधिक वित्तीय स्वायत्तता की माँग की है। नया खनन अधिनियम इस महीने के अंत में अंतिम अनुमोदन के लिए संसद में पेश किया जाएगा।