📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Сайт Правительства Российской Федерации
वायरल
डीपफेक वीडियो में दावा: लाव्रोव ने भारत का कूटनीतिक दर्जा खारिज किया – तथ्य जाँच
✍️ Alt News
🗓 06 नव. 2026, 12:17 PM
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एक वायरल वीडियो में रूसी विदेश मंत्री सेर्गेई लाव्रोव के भारत के कूटनीतिक दर्जे को खारिज करने का दावा किया गया है, जिसे डीपफेक के रूप में खारिज कर दिया गया है।
एक वीडियो जो सोशल मीडिया पर तेजी से फैला, उसमें रूसी विदेश मंत्री सेर्गेई लाव्रोव को भारत के कूटनीतिक दर्जे को खारिज करते हुए दिखाया गया है। इस क्लिप को कई उपयोगकर्ताओं ने साझा किया, जिसमें विकृत भाषण और पृष्ठभूमि शामिल है जो किसी भी ज्ञात आधिकारिक कार्यक्रम से मेल नहीं खाती।
रूस के विदेश मंत्रालय की किसी भी आधिकारिक प्रतिलिपि या प्रेस विज्ञप्ति में ऐसी किसी बयान का रिकॉर्ड नहीं है। रूसी कूटनीतिक चैनलों ने इस दावे का समर्थन करने वाला कोई टिप्पणी जारी नहीं किया है, और वीडियो किसी विश्वसनीय समाचार स्रोत के अभिलेखों में भी नहीं मिला।
डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों ने वीडियो को डीपफेक के रूप में पहचान लिया है, जिसमें ऑडियो सिंक, चेहरे की हरकतें और प्रकाश व्यवस्था में असंगतियाँ पाई गईं, जो आम तौर पर संशोधित मीडिया की विशेषताएँ हैं। वीडियो के निर्माताओं ने दावों को पुष्ट करने के लिए कोई विश्वसनीय स्रोत प्रस्तुत नहीं किया है।
इस प्रकार की गलत सूचना कूटनीतिक संबंधों को तनावग्रस्त कर सकती है और सार्वजनिक धारणा को गुमराह कर सकती है। तथ्य‑जांच संगठनों ने दर्शकों से आग्रह किया है कि वे ऐसे सामग्री को साझा करने से पहले स्रोतों की पुष्टि करें।
रूस के विदेश मंत्रालय की किसी भी आधिकारिक प्रतिलिपि या प्रेस विज्ञप्ति में ऐसी किसी बयान का रिकॉर्ड नहीं है। रूसी कूटनीतिक चैनलों ने इस दावे का समर्थन करने वाला कोई टिप्पणी जारी नहीं किया है, और वीडियो किसी विश्वसनीय समाचार स्रोत के अभिलेखों में भी नहीं मिला।
डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों ने वीडियो को डीपफेक के रूप में पहचान लिया है, जिसमें ऑडियो सिंक, चेहरे की हरकतें और प्रकाश व्यवस्था में असंगतियाँ पाई गईं, जो आम तौर पर संशोधित मीडिया की विशेषताएँ हैं। वीडियो के निर्माताओं ने दावों को पुष्ट करने के लिए कोई विश्वसनीय स्रोत प्रस्तुत नहीं किया है।
इस प्रकार की गलत सूचना कूटनीतिक संबंधों को तनावग्रस्त कर सकती है और सार्वजनिक धारणा को गुमराह कर सकती है। तथ्य‑जांच संगठनों ने दर्शकों से आग्रह किया है कि वे ऐसे सामग्री को साझा करने से पहले स्रोतों की पुष्टि करें।