Health
डॉ. विजय शंकर बैरवा ने शरद पूर्णिमा पर आयुर्वेदिक ऋतुचर्या का महत्व बताया
शरद पूर्णिमा के अवसर पर राजकीय आयुर्वेद औषधालय कुस्तला के प्रमुख ने आयुर्वेदिक आहार‑विहार और पित्त दोष के प्रकोप पर विशेष सलाह दी।
शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा) के अवसर पर राजकीय आयुर्वेद औषधालय कुस्तला के प्रमुख डॉ. विजय शंकर बैरवा ने आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना के तहत आयुर्वेदिक स्वास्थ्य संदेश आमजन तक पहुँचाया।
उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में प्रत्येक ऋतु के अनुसार आहार‑विहार में बदलाव आवश्यक है। वर्षा ऋतु के बाद शरद ऋतु में पित्त दोष का प्रकोप बढ़ता है, इसलिए संतुलित एवं सुपाच्य भोजन, पर्याप्त जल सेवन और नियमित दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
डॉ. बैरवा ने शरद पूर्णिमा की सांस्कृतिक परम्परा का भी उल्लेख किया। इस अवसर पर दूध और चावल से बनी खीर को चाँदनी में रखकर प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है, जो शारीरिक व मानसिक शांति प्रदान करता है।
उन्होंने आयुर्वेदिक ऋतुचर्या अपनाने, संतुलित आहार लेने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का आग्रह किया, जिससे शरद ऋतु में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।
उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में प्रत्येक ऋतु के अनुसार आहार‑विहार में बदलाव आवश्यक है। वर्षा ऋतु के बाद शरद ऋतु में पित्त दोष का प्रकोप बढ़ता है, इसलिए संतुलित एवं सुपाच्य भोजन, पर्याप्त जल सेवन और नियमित दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
डॉ. बैरवा ने शरद पूर्णिमा की सांस्कृतिक परम्परा का भी उल्लेख किया। इस अवसर पर दूध और चावल से बनी खीर को चाँदनी में रखकर प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है, जो शारीरिक व मानसिक शांति प्रदान करता है।
उन्होंने आयुर्वेदिक ऋतुचर्या अपनाने, संतुलित आहार लेने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का आग्रह किया, जिससे शरद ऋतु में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।