📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Amiyashrivastava (talk) (Uploads)
धर्म
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फतवे को सामाजिक बहिष्कार के वैध साधन नहीं माना
✍️ The Indian Express
🗓 04 नव. 2026, 01:46 PM
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा कि फतवे के पास लोगों को सामाजिक रूप से बहिष्कृत करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा कि फतवे, जो धार्मिक आदेश होते हैं, को किसी व्यक्ति को सामाजिक रूप से बहिष्कृत करने के वैध साधन के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फतवे का सामाजिक प्रभाव हो सकता है, परन्तु भारतीय कानून के तहत उनका कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।
न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि सामाजिक बहिष्कार संविधान द्वारा प्रदान किए गए समानता और संघ की स्वतंत्रता जैसे मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है। ऐसे किसी भी बहिष्कार को लागू करने का प्रयास अवैध माना जाएगा और न्यायिक समीक्षा के अधीन होगा।
यह निर्णय एक याचिका के जवाब में दिया गया था, जिसमें एक फतवे के तहत किसी व्यक्ति को सामुदायिक गतिविधियों से बाहर करने की कोशिश की गई थी। हाई कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं को सुरक्षित रखने की दिशा में कदम उठाया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश भर में समान मामलों के लिए एक मिसाल स्थापित करेगा, जिससे धार्मिक आदेशों को व्यक्तिगत अधिकारों को सीमित करने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि सामाजिक बहिष्कार संविधान द्वारा प्रदान किए गए समानता और संघ की स्वतंत्रता जैसे मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है। ऐसे किसी भी बहिष्कार को लागू करने का प्रयास अवैध माना जाएगा और न्यायिक समीक्षा के अधीन होगा।
यह निर्णय एक याचिका के जवाब में दिया गया था, जिसमें एक फतवे के तहत किसी व्यक्ति को सामुदायिक गतिविधियों से बाहर करने की कोशिश की गई थी। हाई कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं को सुरक्षित रखने की दिशा में कदम उठाया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश भर में समान मामलों के लिए एक मिसाल स्थापित करेगा, जिससे धार्मिक आदेशों को व्यक्तिगत अधिकारों को सीमित करने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।