📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ashish.prajapati90
धर्म
छत्तीसगढ़ HC ने रायपुर FIR में नफरतपूर्ण टिप्पणी पर पुलिस की निष्क्रियता को चुनौती दी
✍️ The New Indian Express
🗓 04 नव. 2026, 01:32 PM
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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने रायपुर में नफरतपूर्ण टिप्पणी के FIR पर पुलिस की निष्क्रियता को लेकर हस्तक्षेप किया।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने रायपुर में दर्ज नफरतपूर्ण ऑनलाइन टिप्पणी के FIR पर पुलिस की निष्क्रियता को लेकर नोटिस जारी किया। अदालत ने बताया कि धार्मिक अपमान के आरोपों की त्वरित जांच सुनिश्चित करना न्यायपालिका की जिम्मेदारी है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि सोशल मीडिया पर कुछ पोस्टों में पैगंबर के प्रति आपत्तिजनक भाषा प्रयोग की गई थी, जो भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 153ए और 66A के तहत दंडनीय है। FIR दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई में देरी की।
अदालत ने रायपुर पुलिस को मामले को औपचारिक रूप से पंजीकृत करने, गवाहों के बयान लेने और निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। निरंतर निष्क्रियता पर अदालत ने contempt proceedings की चेतावनी भी दी।
कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से धार्मिक संवेदनाओं से जुड़े मामलों में न्यायिक निगरानी तेज हो सकती है, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और घृणा भाषण के बीच संतुलन बना रहे।
शिकायतकर्ता ने बताया कि सोशल मीडिया पर कुछ पोस्टों में पैगंबर के प्रति आपत्तिजनक भाषा प्रयोग की गई थी, जो भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 153ए और 66A के तहत दंडनीय है। FIR दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई में देरी की।
अदालत ने रायपुर पुलिस को मामले को औपचारिक रूप से पंजीकृत करने, गवाहों के बयान लेने और निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। निरंतर निष्क्रियता पर अदालत ने contempt proceedings की चेतावनी भी दी।
कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से धार्मिक संवेदनाओं से जुड़े मामलों में न्यायिक निगरानी तेज हो सकती है, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और घृणा भाषण के बीच संतुलन बना रहे।