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बरेली में 10 घंटे डिजिटल अरेस्ट से बचाव: 10 वर्षीय बेटे ने फ्लाइट मोड से परिवार को बचाया
बरेली के प्रेमनगर थाना क्षेत्र में एक परिवार को 10 घंटे डिजिटल अरेस्ट का सामना करना पड़ा, जिसे 10 वर्षीय बेटे ने फ्लाइट मोड चालू करके बचाया।
बरेली के प्रेमनगर थाना क्षेत्र में एक परिवार को दोपहर 12 बजे एक कॉल मिली, जिसमें खुद को मुंबई ATS अधिकारी बताने वाले ठग ने दावा किया कि उनके आधार पर सिम से पुणे में ड्रग्स कारोबार हुआ है और पुणे कोर्ट ने वारंट जारी किया है।
ठगों ने वॉट्सएप पर फर्जी वारंट और पुलिस वर्दी की फोटो भेजी, फिर वीडियो कॉल पर आने के लिए कहा, अन्यथा 2 घंटे में पुलिस घर पहुँचकर गिरफ्तार कर लेगी। डर के कारण पति-पत्नी 10 घंटे तक वीडियो कॉल पर बैठे रहे और ठगों ने प्रॉपर्टी, बैंक बैलेंस और FD के बारे में पूछते हुए 6 लाख रुपये ट्रांसफर करने को कहा।
घर में 10 वर्षीय बेटा, जो 8वीं कक्षा में पढ़ता है, ने देखा कि माता-पिता रोते हुए वीडियो कॉल पर बात कर रहे हैं। उसने कई बार कहा कि यह फ्रॉड है, पर माता-पिता डरे हुए थे। रात 10 बजे जब ठगों ने पैसा भेजने का दबाव बढ़ाया, तो बेटे ने बिना कुछ कहे फोन को फ्लाइट मोड पर डाल दिया। कॉल कटते ही माता-पिता को होश आया और उसने तुरंत पड़ोसी को बुलाकर 1930 पर कॉल करवाया। इस एक कदम से परिवार के 6 लाख रुपये बच गए।
बरेली जोन पुलिस ने इस बच्चे को सम्मानित किया और साइबर हेल्पलाइन 1930 तथा cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करने की सलाह दी। साथ ही, इस घटना से सीखते हुए पाँच महत्वपूर्ण टिप्स भी साझा किए गए: डिजिटल अरेस्ट का कोई कानूनी आधार नहीं, असली पुलिस कभी वीडियो कॉल पर वारंट नहीं दिखाती, ठगों के तीन हथकंडे पहचानें, फंसने पर फ्लाइट मोड या फोन बंद करें, और तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें।
ठगों ने वॉट्सएप पर फर्जी वारंट और पुलिस वर्दी की फोटो भेजी, फिर वीडियो कॉल पर आने के लिए कहा, अन्यथा 2 घंटे में पुलिस घर पहुँचकर गिरफ्तार कर लेगी। डर के कारण पति-पत्नी 10 घंटे तक वीडियो कॉल पर बैठे रहे और ठगों ने प्रॉपर्टी, बैंक बैलेंस और FD के बारे में पूछते हुए 6 लाख रुपये ट्रांसफर करने को कहा।
घर में 10 वर्षीय बेटा, जो 8वीं कक्षा में पढ़ता है, ने देखा कि माता-पिता रोते हुए वीडियो कॉल पर बात कर रहे हैं। उसने कई बार कहा कि यह फ्रॉड है, पर माता-पिता डरे हुए थे। रात 10 बजे जब ठगों ने पैसा भेजने का दबाव बढ़ाया, तो बेटे ने बिना कुछ कहे फोन को फ्लाइट मोड पर डाल दिया। कॉल कटते ही माता-पिता को होश आया और उसने तुरंत पड़ोसी को बुलाकर 1930 पर कॉल करवाया। इस एक कदम से परिवार के 6 लाख रुपये बच गए।
बरेली जोन पुलिस ने इस बच्चे को सम्मानित किया और साइबर हेल्पलाइन 1930 तथा cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करने की सलाह दी। साथ ही, इस घटना से सीखते हुए पाँच महत्वपूर्ण टिप्स भी साझा किए गए: डिजिटल अरेस्ट का कोई कानूनी आधार नहीं, असली पुलिस कभी वीडियो कॉल पर वारंट नहीं दिखाती, ठगों के तीन हथकंडे पहचानें, फंसने पर फ्लाइट मोड या फोन बंद करें, और तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें।