📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jørgen Løken
राजनीति
बीजेपी की पिंकी गुर्जर, आईएएस अधिकारी की पत्नी, दौसा जिला परिषद के वार्ड‑13 में चुनाव लड़ रही हैं
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 30 अक्टू. 2026, 02:15 PM
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आईएएस अधिकारी सुमेर सिंह गुर्जर की पत्नी पिंकी गुर्जर, दौसा जिला परिषद के वार्ड‑13 के लिए बीजेपी टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं और गांव‑गांव जाकर प्रचार कर रही हैं।
दौसा जिला परिषद के चुनावों में वार्ड‑13 के लिए प्रतिस्पर्धा तेज़ हो गई है। भाजपा के टिकट पर पिंकी गुर्जर ने इस सीट के लिए अपना नामांकन दायर किया है। यह स्थानीय निकाय चुनाव राजस्थान के व्यापक चुनावी परिप्रेक्ष्य में जिला परिषद के गठन को तय करेगा, जो क्षेत्रीय विकास और नागरिक सेवाओं की देखरेख करता है।
पिंकी गुर्जर, 1998 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुमेर सिंह गुर्जर की पत्नी हैं, जो राज्य में अपनी प्रशासनिक सेवाओं के लिए जाने जाते हैं। अपने पति के प्रशासनिक अनुभव को आधार बनाकर, उन्होंने स्वयं को ऐसा उम्मीदवार प्रस्तुत किया है जो जमीनी समस्याओं को प्रभावी शासन के साथ जोड़ सके। उनके पति की प्रतिष्ठा ने इस उम्मीदवार पर अतिरिक्त ध्यान आकर्षित किया है।
पिंकी गुर्जर ने अपने प्रचार को सादगी और प्रत्यक्ष संपर्क पर केंद्रित किया है। वह वार्ड के प्रत्येक गांव में जाकर निवासियों से व्यक्तिगत तौर पर बात कर रही हैं और बड़े सभाओं के बजाय छोटे-छोटे मिलन समारोहों में समर्थन मांग रही हैं। यह द्वार‑से‑द्वार पद्धति ग्रामीण मतदाताओं के बीच पहुँच और ईमानदारी को महत्व देने वाले संदेश को उजागर करती है।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वार्ड‑13 की लड़ाई जिले में भाजपा की स्थिति का संकेत दे सकती है, जो पूरे परिषद के परिणामों को प्रभावित करेगी। जबकि प्रतिस्पर्धा कड़ी है, पिंकी गुर्जर की जमीनी पहुंच और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से उनके संबंध आगामी हफ्तों में मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित करने की संभावना रखते हैं।
पिंकी गुर्जर, 1998 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुमेर सिंह गुर्जर की पत्नी हैं, जो राज्य में अपनी प्रशासनिक सेवाओं के लिए जाने जाते हैं। अपने पति के प्रशासनिक अनुभव को आधार बनाकर, उन्होंने स्वयं को ऐसा उम्मीदवार प्रस्तुत किया है जो जमीनी समस्याओं को प्रभावी शासन के साथ जोड़ सके। उनके पति की प्रतिष्ठा ने इस उम्मीदवार पर अतिरिक्त ध्यान आकर्षित किया है।
पिंकी गुर्जर ने अपने प्रचार को सादगी और प्रत्यक्ष संपर्क पर केंद्रित किया है। वह वार्ड के प्रत्येक गांव में जाकर निवासियों से व्यक्तिगत तौर पर बात कर रही हैं और बड़े सभाओं के बजाय छोटे-छोटे मिलन समारोहों में समर्थन मांग रही हैं। यह द्वार‑से‑द्वार पद्धति ग्रामीण मतदाताओं के बीच पहुँच और ईमानदारी को महत्व देने वाले संदेश को उजागर करती है।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वार्ड‑13 की लड़ाई जिले में भाजपा की स्थिति का संकेत दे सकती है, जो पूरे परिषद के परिणामों को प्रभावित करेगी। जबकि प्रतिस्पर्धा कड़ी है, पिंकी गुर्जर की जमीनी पहुंच और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से उनके संबंध आगामी हफ्तों में मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित करने की संभावना रखते हैं।