📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Hbdoctor
राजनीति
AAP ने BJP दिल्ली सरकार पर 22,000 करोड़ रुपये के चावल घोटाले का आरोप लगाया
✍️ The Economic Times
🗓 09 अग. 2026, 07:33 PM
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आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि दिल्ली सरकार ₹22,000 करोड़ रुपये के चावल घोटाले की योजना बना रही है। इस आरोप ने राजधानी में राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है।
आम आदमी पार्टी (AAP) ने आज यह आरोप लगाया कि भाजपा सरकार दिल्ली में ₹22,000 करोड़ रुपये के चावल घोटाले की योजना बना रही है। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि यह योजना राज्य द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले चावल को निजी इकाइयों को सौंपकर लाभ कमाने और राजस्व को पार्टी के खजाने में डालने पर आधारित है। उन्होंने इस दावे का समर्थन आंतरिक दस्तावेज़ों और गवाहों के बयान से किया।
यह घोटाला राज्य के सब्सिडी वाले चावल वितरण तंत्र का दुरुपयोग करेगा, जिसे निम्न‑आय वर्ग के परिवारों को किफायती खाद्य अनाज उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है। AAP का कहना है कि भाजपा प्रशासन ने कुछ आपूर्तिकर्ताओं को अनुबंध देकर, जो पार्टी के अंदरूनी लोगों से जुड़े हैं, अनुबंधों में हेरफेर किया है।
भाजपा के प्रतिनिधियों ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और ठोस साक्ष्य की कमी पर जोर दिया। दिल्ली के मुख्यमंत्री के कार्यालय ने एक बयान जारी किया, जिसमें सार्वजनिक को आधिकारिक जांच का इंतजार करने का आग्रह किया गया।
इस आरोप ने राजधानी में पहले से ही तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल को और बढ़ा दिया है, और विपक्षी दलों ने पारदर्शी जाँच की मांग की है। विश्लेषकों का मानना है कि यह दावा आगामी स्थानीय चुनावों पर असर डाल सकता है और सरकार के खरीद प्रक्रियाओं पर अधिक निगरानी की मांग कर सकता है।
यह घोटाला राज्य के सब्सिडी वाले चावल वितरण तंत्र का दुरुपयोग करेगा, जिसे निम्न‑आय वर्ग के परिवारों को किफायती खाद्य अनाज उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है। AAP का कहना है कि भाजपा प्रशासन ने कुछ आपूर्तिकर्ताओं को अनुबंध देकर, जो पार्टी के अंदरूनी लोगों से जुड़े हैं, अनुबंधों में हेरफेर किया है।
भाजपा के प्रतिनिधियों ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और ठोस साक्ष्य की कमी पर जोर दिया। दिल्ली के मुख्यमंत्री के कार्यालय ने एक बयान जारी किया, जिसमें सार्वजनिक को आधिकारिक जांच का इंतजार करने का आग्रह किया गया।
इस आरोप ने राजधानी में पहले से ही तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल को और बढ़ा दिया है, और विपक्षी दलों ने पारदर्शी जाँच की मांग की है। विश्लेषकों का मानना है कि यह दावा आगामी स्थानीय चुनावों पर असर डाल सकता है और सरकार के खरीद प्रक्रियाओं पर अधिक निगरानी की मांग कर सकता है।