📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Krishna Chaitanya Velaga
राजनीति
जंतर मंतर पर वाम दलों के छात्र संगठन के मार्च में योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण को गिरफ्तार
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 03 अक्टू. 2026, 03:32 PM
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वाम दलों के छात्र संगठन ने जंतर मंतर पर मार्च किया, जिसके दौरान योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को गिरफ्तार किया गया।
रविवार की सुबह, दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर मंतर पर वाम‑पंथी छात्र संगठनों ने सरकार की हालिया नीतिगत निर्णयों के खिलाफ विरोध मार्च किया। यह मार्च कई प्रमुख वाम दलों के छात्र विंगों द्वारा आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य शिक्षा सुधार और नागरिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर प्रकाश डालना था।
रैली के दौरान, पुलिस ने सार्वजनिक सुरक्षा और विरोधी प्रदर्शनकारियों के साथ संभावित झड़पों को लेकर चिंता जताते हुए भीड़ को भंग करने के लिए हस्तक्षेप किया। इस दौरान कई प्रतिभागियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें प्रमुख राजनीतिक टिप्पणीकार योगेंद्र यादव और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण भी शामिल थे।
यादव और भूषण, जो सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं, को दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें आगे की जांच के लिए पुलिस स्टेशन में रखा गया। इन हिरासतों पर विपक्षी नेताओं ने आलोचना की है, यह कहते हुए कि यह राजनीतिक प्रेरित कदम है।
पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई थी, और वे आश्वस्त करते हैं कि हिरासत में लिए गए विरोधकारियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। इस घटना ने विरोध के अधिकार और दिल्ली में राज्य शक्ति की सीमाओं पर बहस को फिर से प्रज्वलित किया है।
रैली के दौरान, पुलिस ने सार्वजनिक सुरक्षा और विरोधी प्रदर्शनकारियों के साथ संभावित झड़पों को लेकर चिंता जताते हुए भीड़ को भंग करने के लिए हस्तक्षेप किया। इस दौरान कई प्रतिभागियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें प्रमुख राजनीतिक टिप्पणीकार योगेंद्र यादव और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण भी शामिल थे।
यादव और भूषण, जो सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं, को दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें आगे की जांच के लिए पुलिस स्टेशन में रखा गया। इन हिरासतों पर विपक्षी नेताओं ने आलोचना की है, यह कहते हुए कि यह राजनीतिक प्रेरित कदम है।
पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई थी, और वे आश्वस्त करते हैं कि हिरासत में लिए गए विरोधकारियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। इस घटना ने विरोध के अधिकार और दिल्ली में राज्य शक्ति की सीमाओं पर बहस को फिर से प्रज्वलित किया है।