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14 Oct 2026•
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यूपी पंचायत चुनाव से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है.

✍️ Reporter: Ankit Dwivedi 🗓 14 Oct 2026, 06:38 PM 👁 7
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रधानों को ही प्रशासक पद कर कायम रखने का भी आदेश

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बड़ी खबर है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि तीन महीने के भीतर चुनाव कराए जाएं. हाईकोर्ट ने कहा कि निवर्तमान ग्राम प्रधान ही प्रशासक के रूप में काम करते रहेंगे. करीब तीन घंटे की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच ने सुनाया.
कुल 11 याचिकाओं में समय से पंचायत चुनाव कराने और प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिनमें 6 जनहित याचिकाएं भी शामिल हैं. जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच इन सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही थी. याचिकाओं में योगी सरकार के 25 मई के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया था. इन मामलों में यूपी सरकार, निदेशक पंचायती राज, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला पंचायती राज अधिकारी को पक्षकार बनाया गया है.
यूपी सरकार का शासनादेश वैध
हालांकि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को राहत देते हुए 25 मई 2026 के शासनादेश को वैध बताया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि निवर्तमान प्रधान जो कि प्रशासक नियुक्त किए गए हैं, वह अपने पद पर तब तक कार्य करते रहेंगे. लेकिन राज्य सरकार निर्वाचन आयोग को चुनाव कराने के लिए सभी संसाधन मुहैया कराएगी. जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया है.
अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल के मुताबिक जिन याचिकाओं में राज्य सरकार के 25 मई 2026 के शासनादेश में प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने को चुनौती दी गई थी उन्हें हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. जहां-जहां एक्ट की वैधता को चुनौती दी गई थी उसे भी कोर्ट ने निरस्त कर दिया है.
हाईकोर्ट के फैसले से साफ है कि निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में अगले 3 महीने तक कार्य करते रहेंगे. लेकिन राज्य सरकार 3 महीने में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न कराएगी. अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कहा है कि एक्ट में यह प्रावधान है कि अगर समय से पंचायत चुनाव नहीं हो पाते हैं, तो प्रशासक नियुक्त किया जा सकता है. इसी के तहत सरकार ने प्रशासकों की नियुक्ति की थी.
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