योग से कैसे मजबूत करें बच्चों को
योग के द्वारा ही हम आने वाली पीढ़ी को मजबूत और सशक्त बना सकते हैं जिससे एक अच्छे समाज का निर्माण हो
*प्रेस विज्ञप्ति*
*विषय: योग से अवसाद पर नियंत्रण संभव - विशेषज्ञों ने बताया योग तनाव और अवसाद दूर करने का प्राकृतिक उपाय*
*लखनऊ, 12 अगस्त 2026*
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और अवसाद आम समस्या बन गए हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं के साथ-साथ योग को जीवनशैली में अपनाकर अवसाद को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
योग न सिर्फ शरीर को लचीला बनाता है बल्कि मन को शांति और स्थिरता भी देता है। नियमित योगाभ्यास से मस्तिष्क में "हैप्पी हार्मोन" यानी सेरोटोनिन और डोपामिन का स्तर बढ़ता है, जिससे नकारात्मक सोच कम होती है और सकारात्मकता आती है।
*योग कैसे मदद करता है:*
1. *तनाव हार्मोन कम करता है*: प्राणायाम और ध्यान से कोर्टिसोल का स्तर घटता है
2. *नींद बेहतर होती है*: अनुलोम-विलोम और शवासन से अनिद्रा की समस्या दूर होती है
3. *आत्मविश्वास बढ़ता है*: आसनों से शरीर और मन दोनों में ऊर्जा का संचार होता है
4. *भावनाओं पर नियंत्रण*: ध्यान और मेडिटेशन से गुस्सा, चिड़चिड़ापन और उदासी पर काबू पाने में मदद मिलती है
योगाचार्यों के अनुसार रोजाना 30-40 मिनट योग करने से 8-10 सप्ताह में ही मूड और ऊर्जा स्तर में सकारात्मक बदलाव देखे जा सकते हैं। इसमें सूर्य नमस्कार, भुजंगासन, बालासन, शवासन और 10 मिनट का ध्यान सबसे असरदार माने गए हैं।
*विशेषज्ञ की राय:*
"योग दवा का विकल्प नहीं है, लेकिन यह एक मजबूत सहयोगी जरूर है। अवसाद के मरीज दवा के साथ नियमित योग करें तो रिकवरी तेज होती है और दोबारा होने का खतरा कम होता है" - [योग विशेषज्ञ/डॉक्टर का नाम]
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के बाद से स्कूल, कॉलेज और कॉर्पोरेट में भी योग सत्र शुरू किए जा रहे हैं ताकि युवा पीढ़ी मानसिक रूप से मजबूत बन सके।
अगर आप या आपका कोई परिचित तनाव या अवसाद से जूझ रहा है तो प्रमाणित योग शिक्षक के मार्गदर्शन में योग शुरू करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से परामर्श भी लें।
*जारीकर्ता:*
डॉ महेश लाल
*विषय: योग से अवसाद पर नियंत्रण संभव - विशेषज्ञों ने बताया योग तनाव और अवसाद दूर करने का प्राकृतिक उपाय*
*लखनऊ, 12 अगस्त 2026*
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और अवसाद आम समस्या बन गए हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं के साथ-साथ योग को जीवनशैली में अपनाकर अवसाद को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
योग न सिर्फ शरीर को लचीला बनाता है बल्कि मन को शांति और स्थिरता भी देता है। नियमित योगाभ्यास से मस्तिष्क में "हैप्पी हार्मोन" यानी सेरोटोनिन और डोपामिन का स्तर बढ़ता है, जिससे नकारात्मक सोच कम होती है और सकारात्मकता आती है।
*योग कैसे मदद करता है:*
1. *तनाव हार्मोन कम करता है*: प्राणायाम और ध्यान से कोर्टिसोल का स्तर घटता है
2. *नींद बेहतर होती है*: अनुलोम-विलोम और शवासन से अनिद्रा की समस्या दूर होती है
3. *आत्मविश्वास बढ़ता है*: आसनों से शरीर और मन दोनों में ऊर्जा का संचार होता है
4. *भावनाओं पर नियंत्रण*: ध्यान और मेडिटेशन से गुस्सा, चिड़चिड़ापन और उदासी पर काबू पाने में मदद मिलती है
योगाचार्यों के अनुसार रोजाना 30-40 मिनट योग करने से 8-10 सप्ताह में ही मूड और ऊर्जा स्तर में सकारात्मक बदलाव देखे जा सकते हैं। इसमें सूर्य नमस्कार, भुजंगासन, बालासन, शवासन और 10 मिनट का ध्यान सबसे असरदार माने गए हैं।
*विशेषज्ञ की राय:*
"योग दवा का विकल्प नहीं है, लेकिन यह एक मजबूत सहयोगी जरूर है। अवसाद के मरीज दवा के साथ नियमित योग करें तो रिकवरी तेज होती है और दोबारा होने का खतरा कम होता है" - [योग विशेषज्ञ/डॉक्टर का नाम]
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के बाद से स्कूल, कॉलेज और कॉर्पोरेट में भी योग सत्र शुरू किए जा रहे हैं ताकि युवा पीढ़ी मानसिक रूप से मजबूत बन सके।
अगर आप या आपका कोई परिचित तनाव या अवसाद से जूझ रहा है तो प्रमाणित योग शिक्षक के मार्गदर्शन में योग शुरू करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से परामर्श भी लें।
*जारीकर्ता:*
डॉ महेश लाल