📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sujay25
राजनीति
पश्चिम बंगाल में 6 महीने में लागू होगा समान नागरिक संहिता, कड़ा जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून
✍️ India Today
🗓 04 अक्टू. 2026, 07:36 PM
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पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि छह महीने में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी और जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए कड़ा कानून तैयार किया जा रहा है।
कोलकाता, 4 अक्टूबर (इंडिया टुडे) – पश्चिम बंगाल सरकार ने अगले छह महीनों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की योजना की घोषणा की। इस कदम से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे व्यक्तिगत कानूनों को एक ही नागरिक संहिता के तहत लाया जाएगा।
समान नागरिक संहिता के साथ ही एक कड़ा जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून भी तैयार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसी भी प्रकार के दबाव या आर्थिक लाभ के आधार पर धर्म परिवर्तन को रोकना है।
इन दोनों विधेयकों के विस्तृत प्रावधान अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं; राज्य ने बताया कि इन्हें आगामी हफ्तों में विधानसभा में चर्चा के लिए पेश किया जाएगा। यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर समान नागरिक संहिता और धर्मांतरण संबंधी चिंताओं के बीच उठाया गया है।
धार्मिक संगठनों और नागरिक समाज के समूहों से इन विधेयकों पर प्रतिक्रिया की उम्मीद है, पर सरकार का कहना है कि ये उपाय सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हैं।
यह पहल पश्चिम बंगाल की व्यापक कानूनी सुधार एजेंडा का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य व्यक्तिगत कानूनों को मानकीकृत करना और शोषणकारी प्रथाओं को रोकना है।
समान नागरिक संहिता के साथ ही एक कड़ा जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून भी तैयार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसी भी प्रकार के दबाव या आर्थिक लाभ के आधार पर धर्म परिवर्तन को रोकना है।
इन दोनों विधेयकों के विस्तृत प्रावधान अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं; राज्य ने बताया कि इन्हें आगामी हफ्तों में विधानसभा में चर्चा के लिए पेश किया जाएगा। यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर समान नागरिक संहिता और धर्मांतरण संबंधी चिंताओं के बीच उठाया गया है।
धार्मिक संगठनों और नागरिक समाज के समूहों से इन विधेयकों पर प्रतिक्रिया की उम्मीद है, पर सरकार का कहना है कि ये उपाय सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हैं।
यह पहल पश्चिम बंगाल की व्यापक कानूनी सुधार एजेंडा का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य व्यक्तिगत कानूनों को मानकीकृत करना और शोषणकारी प्रथाओं को रोकना है।