📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Avrajyoti Mitra
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विमल इलायची निर्माता PB Agro ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक्टर्स को नोटिस देने वाले फ़ूड बॉडी के खिलाफ दायर किया केस
✍️ NDTV
🗓 08 सित. 2026, 09:41 AM
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विमल इलायची निर्माता PB Agro ने दिल्ली हाई कोर्ट में तीन अभिनेताओं को फ़ूड रेगुलेटर द्वारा जारी किए गए नोटिस को चुनौती दी, यह दावा करते हुए कि उनका विज्ञापन कानून के अनुरूप है।
विमल इलायची ब्रांड के पीछे की कंपनी PB Agro ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें वह फ़ूड रेगुलेटर द्वारा तीन प्रसिद्ध अभिनेताओं को भेजे गए नोटिस को रद्द करने की माँग कर रही है। कंपनी का कहना है कि इन नोटिसों में दिये गए आरोप बेमतलब हैं।
फ़ूड बॉडी, यानी फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI), ने कहा था कि विज्ञापनों में लेबलिंग और स्वास्थ्य दावों के नियमों का उल्लंघन हो सकता है, और इन तीन अभिनेताओं को अपने उत्तर प्रस्तुत करने को कहा गया।
PB Agro ने बताया कि उन्होंने प्रतिष्ठित अभिनेताओं के साथ एन्डोर्समेंट समझौते किए हैं और पूरी विज्ञापन अभियान सभी लागू कानूनों, विशेषकर फ़ूड सुरक्षा और विज्ञापन मानकों के अनुरूप है। कंपनी ने यह भी कहा कि विज्ञापन शुरू करने से पहले सभी नियामक आवश्यकताओं का पालन किया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत में फ़ूड उत्पादों के सेलिब्रिटी एन्डोर्समेंट पर बढ़ती निगरानी को दर्शाता है, विशेषकर इलायची जैसे स्वास्थ्य‑लाभ वाले उत्पादों के लिए। हाई कोर्ट का फैसला भविष्य में फ़ूड विज्ञापन के नियमन के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
फ़ूड बॉडी, यानी फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI), ने कहा था कि विज्ञापनों में लेबलिंग और स्वास्थ्य दावों के नियमों का उल्लंघन हो सकता है, और इन तीन अभिनेताओं को अपने उत्तर प्रस्तुत करने को कहा गया।
PB Agro ने बताया कि उन्होंने प्रतिष्ठित अभिनेताओं के साथ एन्डोर्समेंट समझौते किए हैं और पूरी विज्ञापन अभियान सभी लागू कानूनों, विशेषकर फ़ूड सुरक्षा और विज्ञापन मानकों के अनुरूप है। कंपनी ने यह भी कहा कि विज्ञापन शुरू करने से पहले सभी नियामक आवश्यकताओं का पालन किया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत में फ़ूड उत्पादों के सेलिब्रिटी एन्डोर्समेंट पर बढ़ती निगरानी को दर्शाता है, विशेषकर इलायची जैसे स्वास्थ्य‑लाभ वाले उत्पादों के लिए। हाई कोर्ट का फैसला भविष्य में फ़ूड विज्ञापन के नियमन के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।