Agriculture
विदिशा: ग्राम हड़ा में किसानों को दलहन उत्पादन और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण
ग्राम हड़ा में आयोजित कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को दलहन उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक खेती और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
विदिशा जिले के ग्राम हड़ा में कृषकों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, दलहन उत्पादन में वृद्धि करने तथा जल एवं मृदा संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कृषि विभाग विकासखंड नटेरन, आईटीसी मिशन सुनहरा कल, विदिशा तथा ल्यूपिन ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों, जैविक खेती, कृषि यंत्रीकरण और विभिन्न शासकीय योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। इस अवसर पर कृषक उत्पादक संगठन (FPO) के संचालक मंडल की बैठक भी संपन्न हुई।
प्रशिक्षण के दौरान दलहन आत्मनिर्भर मिशन के अंतर्गत चना और मसूर की खेती को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को उन्नत बीजों के चयन, सही समय पर बुवाई, बीजोपचार और संतुलित पोषण प्रबंधन के महत्व से अवगत कराया गया। अधिकारियों ने दलहनी फसलों को फसल चक्र में शामिल करने की सलाह दी, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिले। क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी अभिषेक जैन ने किसानों को उर्वरक प्राप्ति हेतु ई-टोकन व्यवस्था और व्हाट्सएप चैटबॉट (6269141000) के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों की उपयोगिता, आवेदन प्रक्रिया और पात्रता संबंधी जानकारी दी गई, जिससे जल का कुशल उपयोग सुनिश्चित हो सके। कृषि यंत्रीकरण पर चर्चा करते हुए आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग से बुवाई, निराई-गुड़ाई और कटाई जैसे कार्यों को समय पर पूरा करने के लाभ बताए गए। साथ ही, संबंधित योजनाओं में उपलब्ध अनुदान और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी लेने हेतु प्रेरित किया गया।
विकासखंड तकनीकी प्रबंधक नरेंद्र सिंह रघुवंशी ने जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने गोबर की खाद, कम्पोस्ट और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग के साथ-साथ फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के महत्व को समझाया। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक 2.0 के तहत जल संरक्षण, वर्षा जल के बेहतर उपयोग और मिट्टी की उत्पादकता बनाए रखने के उपायों पर भी चर्चा हुई, जिससे किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु प्रेरित किया जा सके। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान दलहन आत्मनिर्भर मिशन के अंतर्गत चना और मसूर की खेती को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को उन्नत बीजों के चयन, सही समय पर बुवाई, बीजोपचार और संतुलित पोषण प्रबंधन के महत्व से अवगत कराया गया। अधिकारियों ने दलहनी फसलों को फसल चक्र में शामिल करने की सलाह दी, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिले। क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी अभिषेक जैन ने किसानों को उर्वरक प्राप्ति हेतु ई-टोकन व्यवस्था और व्हाट्सएप चैटबॉट (6269141000) के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों की उपयोगिता, आवेदन प्रक्रिया और पात्रता संबंधी जानकारी दी गई, जिससे जल का कुशल उपयोग सुनिश्चित हो सके। कृषि यंत्रीकरण पर चर्चा करते हुए आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग से बुवाई, निराई-गुड़ाई और कटाई जैसे कार्यों को समय पर पूरा करने के लाभ बताए गए। साथ ही, संबंधित योजनाओं में उपलब्ध अनुदान और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी लेने हेतु प्रेरित किया गया।
विकासखंड तकनीकी प्रबंधक नरेंद्र सिंह रघुवंशी ने जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने गोबर की खाद, कम्पोस्ट और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग के साथ-साथ फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के महत्व को समझाया। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक 2.0 के तहत जल संरक्षण, वर्षा जल के बेहतर उपयोग और मिट्टी की उत्पादकता बनाए रखने के उपायों पर भी चर्चा हुई, जिससे किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु प्रेरित किया जा सके। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।