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विश्व स्ट्रोक दिवस पर बेद के गुदगे अस्पताल में जनजागरूकता कार्यक्रम
अक्टूबर 29 को विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर बेद के गुदगे अस्पताल में 11 बजे से जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने स्ट्रोक के प्रारम्भिक लक्षण और त्वरित उपचार के महत्व पर प्रकाश डाला।
अक्टूबर 29 को विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर बेद के गुदगे अस्पताल में सुबह 11 बजे से जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्ट्रोक के प्रति जनता में जागरूकता बढ़ाना और त्वरित उपचार के महत्व पर बल देना था।
कार्यक्रम का अध्यक्ष गुदगे अस्पताल के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. चंद्रकाथ गुदगे ने किया। कार्यक्रम में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नितिन गुदगे, डॉ. महेश थोंदरे, डॉ. विश्वनाथ पटेल तथा डॉ. अश्विनी खपले सहित अन्य चिकित्सक एवं अस्पताल के कर्मचारी उपस्थित रहे।
सत्र में स्ट्रोक के प्रारम्भिक लक्षण, जोखिम कारक, रोकथाम के उपाय और आपातकालीन उपचार के महत्व पर चर्चा की गई। विशेष रूप से चेहरे के एक पक्ष का झुकना, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी, बोलने में कठिनाई जैसे लक्षणों की पहचान पर बल दिया गया। डॉ. चंद्रकाथ गुदगे ने बताया कि स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने के बाद पहले चार घंटे को 'गोल्डन आवर' माना जाता है, जब उचित उपचार से मस्तिष्क क्षति को कम किया जा सकता है।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनता को स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान और त्वरित चिकित्सा सहायता लेने के लिए प्रेरित करना तथा हृदय एवं तंत्रिका तंत्र की बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
कार्यक्रम का अध्यक्ष गुदगे अस्पताल के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. चंद्रकाथ गुदगे ने किया। कार्यक्रम में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नितिन गुदगे, डॉ. महेश थोंदरे, डॉ. विश्वनाथ पटेल तथा डॉ. अश्विनी खपले सहित अन्य चिकित्सक एवं अस्पताल के कर्मचारी उपस्थित रहे।
सत्र में स्ट्रोक के प्रारम्भिक लक्षण, जोखिम कारक, रोकथाम के उपाय और आपातकालीन उपचार के महत्व पर चर्चा की गई। विशेष रूप से चेहरे के एक पक्ष का झुकना, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी, बोलने में कठिनाई जैसे लक्षणों की पहचान पर बल दिया गया। डॉ. चंद्रकाथ गुदगे ने बताया कि स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने के बाद पहले चार घंटे को 'गोल्डन आवर' माना जाता है, जब उचित उपचार से मस्तिष्क क्षति को कम किया जा सकता है।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनता को स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान और त्वरित चिकित्सा सहायता लेने के लिए प्रेरित करना तथा हृदय एवं तंत्रिका तंत्र की बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।