Health
वाराणसी में आयुष मंत्रालय का गठिया उपचार एवं शोध केंद्र: युवाओं में भी बढ़ रहा जोड़ों का दर्द
अंतर्राष्ट्रीय गठिया दिवस पर वाराणसी के राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय में संचालित गठिया उपचार एवं शोध केंद्र के प्रभारी डॉ. मनीष मिश्रा ने बताया कि बदलती जीवनशैली के कारण अब 30-35 साल के युवाओं में भी जोड़ों का दर्द तेजी से बढ़ रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय गठिया दिवस (12 अक्टूबर) के अवसर पर वाराणसी के राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय में संचालित गठिया उपचार एवं शोध केंद्र के प्रभारी डॉ. मनीष मिश्रा ने बताया कि पहले जहां गठिया को 50 वर्ष से अधिक आयु की बीमारी माना जाता था, वहीं अब बदलती जीवनशैली और खानपान के कारण 30-35 वर्ष के युवाओं में भी घुटनों, कमर और गर्दन के दर्द के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि आयुष मंत्रालय के मंत्री द्वारा की गई एक बैठक में यह पाया गया कि सर्वाधिक मरीज पेट संबंधी रोगों और जोड़ों के दर्द से पीड़ित हैं। इसी समस्या को देखते हुए आयुष मिशन के तहत पहले लखनऊ और फिर 17 सितंबर 2024 को वाराणसी में इस विशेष केंद्र का लोकार्पण किया गया।
यह केंद्र सामान्य ओपीडी से अलग है, क्योंकि यहां गठिया के मरीजों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाता है। दवा उपचार के साथ-साथ मरीजों को आहार में परिवर्तन, जीवनशैली में सुधार, व्यायाम और बीमारी के प्रति जागरूकता के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी जाती है।
डॉ. मिश्रा के अनुसार, आधुनिक चिकित्सा पद्धति में गठिया का इलाज मुख्य रूप से दर्द और सूजन कम करने वाली दवाओं पर आधारित है, जिनके दीर्घकालिक सेवन से दुष्प्रभाव हो सकते हैं। गठिया की गंभीर स्थिति में जोड़ों के बीच का गैप समाप्त हो जाता है, जिसके बाद कृत्रिम जोड़ (ऑपरेशन) ही एकमात्र विकल्प बचता है। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य समय रहते जीवनशैली में आवश्यक सुधार लाकर बीमारी को बढ़ने से रोकना है।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि आयुष मंत्रालय के मंत्री द्वारा की गई एक बैठक में यह पाया गया कि सर्वाधिक मरीज पेट संबंधी रोगों और जोड़ों के दर्द से पीड़ित हैं। इसी समस्या को देखते हुए आयुष मिशन के तहत पहले लखनऊ और फिर 17 सितंबर 2024 को वाराणसी में इस विशेष केंद्र का लोकार्पण किया गया।
यह केंद्र सामान्य ओपीडी से अलग है, क्योंकि यहां गठिया के मरीजों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाता है। दवा उपचार के साथ-साथ मरीजों को आहार में परिवर्तन, जीवनशैली में सुधार, व्यायाम और बीमारी के प्रति जागरूकता के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी जाती है।
डॉ. मिश्रा के अनुसार, आधुनिक चिकित्सा पद्धति में गठिया का इलाज मुख्य रूप से दर्द और सूजन कम करने वाली दवाओं पर आधारित है, जिनके दीर्घकालिक सेवन से दुष्प्रभाव हो सकते हैं। गठिया की गंभीर स्थिति में जोड़ों के बीच का गैप समाप्त हो जाता है, जिसके बाद कृत्रिम जोड़ (ऑपरेशन) ही एकमात्र विकल्प बचता है। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य समय रहते जीवनशैली में आवश्यक सुधार लाकर बीमारी को बढ़ने से रोकना है।