धर्म
वाराणसी: जंगमवाड़ी मठ के जगद्गुरु ने विजयादशमी पर दस इंद्रियों पर विजय का संदेश दिया
जगद्गुरु विश्वाराध्य ज्ञानसिंहासन ने विजयादशमी के पावन पर्व पर दस इंद्रियों पर विजय और सहिष्णुता का संदेश दिया, जिसमें उन्होंने धर्म और जीवन पर गहन विचार साझा किये।
वाराणसी के जंगमवाड़ी मठ में आज विजयादशमी के पावन पर्व पर श्री 1008 जगद्गुरु विश्वाराध्य ज्ञानसिंहासन ने धर्म और जीवन पर गहन संदेश दिया। उन्होंने बताया कि दशहरा पूरे देश में एक पवित्र पर्व के रूप में मनाया जाता है और इस दिन विशेष रूप से भगवती देवी की पूजा की जाती है। यह पर्व अपने भीतर के दुर्गुणों पर विजय पाने का प्रतीक है।
जगद्गुरु ने कहा कि भगवान ने हमें दस इंद्रियाँ दी हैं – पाँच ज्ञानेंद्रियाँ और पाँच कर्मेंद्रियाँ। इन दस इंद्रियों को गलत विषयों से रोकना और साधना द्वारा इन पर नियंत्रण पाना ही सच्ची विजय है। यही दशहरा का वास्तविक अर्थ है।
उन्होंने समाज को सहिष्णुता का संदेश देते हुए कहा कि अन्य धर्म के प्रति सम्मान और सहिष्णुता का भाव रखना चाहिए। सभी के त्योहारों में सहयोग करना ही सच्चा धर्म है।
नवरात्रि के समापन पर उन्होंने माँ भगवती के आने-जाने की बात कही और भक्तों से प्रार्थना की कि माँ की शक्ति और विचार सदा हमारे हृदय में बने रहें, ताकि हम जीवन भर सत्य और धर्म के मार्ग पर चल सकें।
जगद्गुरु ने कहा कि भगवान ने हमें दस इंद्रियाँ दी हैं – पाँच ज्ञानेंद्रियाँ और पाँच कर्मेंद्रियाँ। इन दस इंद्रियों को गलत विषयों से रोकना और साधना द्वारा इन पर नियंत्रण पाना ही सच्ची विजय है। यही दशहरा का वास्तविक अर्थ है।
उन्होंने समाज को सहिष्णुता का संदेश देते हुए कहा कि अन्य धर्म के प्रति सम्मान और सहिष्णुता का भाव रखना चाहिए। सभी के त्योहारों में सहयोग करना ही सच्चा धर्म है।
नवरात्रि के समापन पर उन्होंने माँ भगवती के आने-जाने की बात कही और भक्तों से प्रार्थना की कि माँ की शक्ति और विचार सदा हमारे हृदय में बने रहें, ताकि हम जीवन भर सत्य और धर्म के मार्ग पर चल सकें।