Religion
वाराणसी: अर्णब चक्रवात की बारिश के बीच संपन्न हुई चेतगंज की 138 साल पुरानी नक्कटैया
वाराणसी के चेतगंज में 138 वर्ष पुरानी नक्कटैया की परंपरा अर्णब चक्रवात के असर से हो रही बारिश के बावजूद पूरे उत्साह के साथ संपन्न हुई। स्थानीय लोगों ने देर रात तक झांकियों और विद्युत सजावट का आनंद लिया।
वाराणसी, 29 अक्टूबर 2026। काशी की पहचान केवल मंदिरों और गंगा घाटों से ही नहीं, बल्कि यहां की सदियों पुरानी परंपराओं और ऐतिहासिक आयोजनों से भी है। इनमें से एक प्रमुख आयोजन चेतगंज की विश्वप्रसिद्ध नक्कटैया है, जिसका इतिहास लगभग 138 वर्षों पुराना बताया जाता है।
29 अक्टूबर को अर्णब चक्रवात के असर से हो रही बारिश ने इस ऐतिहासिक परंपरा को रोकने में असफलता का सामना किया। खराब मौसम और रिमझिम बारिश के बावजूद चेतगंज की गलियों में नक्कटैया पूरे उत्साह के साथ संपन्न हुई। रामलीला से जुड़ी आकर्षक झांकियां, भव्य विद्युत सजावट और पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग देर रात तक डटे रहे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही यह परंपरा काशी की सांस्कृतिक विरासत और लोक आस्था का जीवंत प्रतीक है। पिछले 138 वर्षों से अनवरत चल रही यह परंपरा अब भी शहरवासियों के बीच गहरी जड़ें जमाए हुए है।
29 अक्टूबर को अर्णब चक्रवात के असर से हो रही बारिश ने इस ऐतिहासिक परंपरा को रोकने में असफलता का सामना किया। खराब मौसम और रिमझिम बारिश के बावजूद चेतगंज की गलियों में नक्कटैया पूरे उत्साह के साथ संपन्न हुई। रामलीला से जुड़ी आकर्षक झांकियां, भव्य विद्युत सजावट और पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग देर रात तक डटे रहे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही यह परंपरा काशी की सांस्कृतिक विरासत और लोक आस्था का जीवंत प्रतीक है। पिछले 138 वर्षों से अनवरत चल रही यह परंपरा अब भी शहरवासियों के बीच गहरी जड़ें जमाए हुए है।