📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Anonymous. From the Macnabb Collection (Col James
स्वास्थ्य
उत्तarakhand HC ने नैनीताल के DM को सार्वजनिक जल सुरक्षा प्रणाली स्थापित करने का निर्देश दिया
✍️ Live Law
🗓 11 सित. 2026, 02:33 PM
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उत्तarakhand हाई कोर्ट ने नैनीताल के जिला मजिस्ट्रेट को हालिया जल प्रदूषण समस्या को सुलझाने के लिए सार्वजनिक उपाय स्थापित करने का आदेश दिया।
उत्तarakhand हाई कोर्ट ने नैनीताल में जल प्रदूषण की शिकायतों को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट को सार्वजनिक जल सुरक्षा प्रणाली स्थापित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि शहर में नल के पानी का रंग बदलना और बदबू आना कई निवासियों को परेशान कर रहा है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहा है।
आदेश में जिला प्रशासन को नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण, परिणामों का सार्वजनिक प्रकाशन और मानकों के उल्लंघन पर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था बनाने को कहा गया है। राज्य जल विभाग और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समन्वय करके तुरंत उपाय लागू करने पर भी बल दिया गया है।
जिला मजिस्ट्रेट को 15 दिनों के भीतर एक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें सार्वजनिक निगरानी तंत्र की स्थापना और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने के कदमों का विवरण होगा। यह निर्णय उत्तarakhand के प्रमुख पर्यटन स्थलों में सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा में न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।
स्थानीय NGOs और निवासियों के समूहों ने इस फैसले का स्वागत किया और शीघ्र कार्यान्वयन की मांग की, ताकि जलजनित रोगों के प्रकोप को रोका जा सके। राज्य सरकार ने अभी तक इस आदेश पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
आदेश में जिला प्रशासन को नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण, परिणामों का सार्वजनिक प्रकाशन और मानकों के उल्लंघन पर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था बनाने को कहा गया है। राज्य जल विभाग और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समन्वय करके तुरंत उपाय लागू करने पर भी बल दिया गया है।
जिला मजिस्ट्रेट को 15 दिनों के भीतर एक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें सार्वजनिक निगरानी तंत्र की स्थापना और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने के कदमों का विवरण होगा। यह निर्णय उत्तarakhand के प्रमुख पर्यटन स्थलों में सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा में न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।
स्थानीय NGOs और निवासियों के समूहों ने इस फैसले का स्वागत किया और शीघ्र कार्यान्वयन की मांग की, ताकि जलजनित रोगों के प्रकोप को रोका जा सके। राज्य सरकार ने अभी तक इस आदेश पर कोई टिप्पणी नहीं की है।