📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / U.S. Department of the Interior
विदेश
US DOE ने 13 राज्यों में पावर‑ग्रिड आपातकाल की घोषणा की
✍️ The Times of India
🗓 30 अक्टू. 2026, 10:45 AM
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US ऊर्जा विभाग ने 13 राज्यों में पावर‑ग्रिड आपातकाल की घोषणा की, जिससे संचालन में बढ़ती कठिनाइयों का संकेत मिला।
संयुक्त राज्य ऊर्जा विभाग (DOE) ने आधिकारिक तौर पर 13 राज्यों में पावर‑ग्रिड आपातकाल की घोषणा की है। यह घोषणा दर्शाती है कि इन क्षेत्रों में बिजली नेटवर्क तनावपूर्ण स्थिति में है, जिसके लिए त्वरित कार्रवाई और समन्वित प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।
DOE के अधिकारियों ने बताया कि आपातकाल की स्थिति अतिरिक्त संसाधनों को जुटाने, निगरानी को सुदृढ़ करने और यूटिलिटी कंपनियों को विश्वसनीय सेवा बनाए रखने में सहायता करने के लिए लागू की गई है। जबकि कारणों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया, यह घोषणा ग्रिड की असुरक्षा को उजागर करती है, चाहे वह अत्यधिक मौसम, उच्च मांग या उपकरण विफलता के कारण हो।
राज्य नियामकों और यूटिलिटी कंपनियों सहित सभी संबंधित पक्षों को फेडरल एजेंसियों के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने और बड़े पैमाने पर बिजली कटौती को रोकने के लिए काम करना होगा। DOE ग्रिड के प्रदर्शन की निरंतर निगरानी करेगा और परिस्थितियों के बदलने पर आपातकाल की स्थिति को पुनः मूल्यांकन कर सकता है।
यह कदम अमेरिकी बिजली बुनियादी ढांचे की स्थिरता के बारे में बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है और ग्रिड आधुनिकीकरण तथा आपातकालीन तैयारी में निरंतर निवेश की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
DOE के अधिकारियों ने बताया कि आपातकाल की स्थिति अतिरिक्त संसाधनों को जुटाने, निगरानी को सुदृढ़ करने और यूटिलिटी कंपनियों को विश्वसनीय सेवा बनाए रखने में सहायता करने के लिए लागू की गई है। जबकि कारणों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया, यह घोषणा ग्रिड की असुरक्षा को उजागर करती है, चाहे वह अत्यधिक मौसम, उच्च मांग या उपकरण विफलता के कारण हो।
राज्य नियामकों और यूटिलिटी कंपनियों सहित सभी संबंधित पक्षों को फेडरल एजेंसियों के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने और बड़े पैमाने पर बिजली कटौती को रोकने के लिए काम करना होगा। DOE ग्रिड के प्रदर्शन की निरंतर निगरानी करेगा और परिस्थितियों के बदलने पर आपातकाल की स्थिति को पुनः मूल्यांकन कर सकता है।
यह कदम अमेरिकी बिजली बुनियादी ढांचे की स्थिरता के बारे में बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है और ग्रिड आधुनिकीकरण तथा आपातकालीन तैयारी में निरंतर निवेश की आवश्यकता को रेखांकित करता है।