📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Grant Baker
अपराध
उप जज ने दावा किया: गंभीर मामलों को उनके कोर्ट से वापस बुलाया गया
✍️ Live Law
🗓 08 सित. 2026, 05:48 PM
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उत्तर प्रदेश के एक जज ने दावा किया कि उनके कोर्ट से गंभीर अपराध मामलों को वापस बुलाया गया, और उन्होंने कहा कि वे डरपोक जज कहलाने से अधिक मरना पसंद करेंगे।
उत्तर प्रदेश के एक जज ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उनके कोर्ट से कई गंभीर अपराध मामलों को वापस बुलाया गया, जिसे उन्होंने न्यायिक व्यवस्था की अखंडता को कमजोर करने वाला बताया। यह बयान मंगलवार को राज्य के एक जिला न्यायालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया गया।
जज के अनुसार, उन मामलों में उच्च‑प्रोफ़ाइल अपराध शामिल थे, और उनकी वापसी के साथ किसी भी आधिकारिक नोटिस या व्याख्या को अदालत प्रशासन द्वारा नहीं भेजा गया था। उन्होंने अपनी निराशा व्यक्त की, कहते हुए कि वे कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए डरपोक जज कहलाने से अधिक मरना पसंद करेंगे।
इन आरोपों ने कानूनी टिप्पणीकारों का ध्यान आकर्षित किया है, जिन्होंने बताया कि ऐसी वापसी से न्याय की समय पर पूर्ति पर असर पड़ सकता है और प्रक्रियात्मक पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं। अभी तक अदालत के प्रमुख न्यायाधीश या राज्य न्यायपालिका द्वारा कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
जज की टिप्पणियों ने कानूनी विशेषज्ञों के बीच केस प्रबंधन के तंत्र और सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के महत्व पर बहस को जन्म दिया है।
इस समय, अदालत ने जज के दावों के संबंध में कोई बयान जारी नहीं किया है, और मामला जांच के अधीन है।
जज के अनुसार, उन मामलों में उच्च‑प्रोफ़ाइल अपराध शामिल थे, और उनकी वापसी के साथ किसी भी आधिकारिक नोटिस या व्याख्या को अदालत प्रशासन द्वारा नहीं भेजा गया था। उन्होंने अपनी निराशा व्यक्त की, कहते हुए कि वे कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए डरपोक जज कहलाने से अधिक मरना पसंद करेंगे।
इन आरोपों ने कानूनी टिप्पणीकारों का ध्यान आकर्षित किया है, जिन्होंने बताया कि ऐसी वापसी से न्याय की समय पर पूर्ति पर असर पड़ सकता है और प्रक्रियात्मक पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं। अभी तक अदालत के प्रमुख न्यायाधीश या राज्य न्यायपालिका द्वारा कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
जज की टिप्पणियों ने कानूनी विशेषज्ञों के बीच केस प्रबंधन के तंत्र और सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के महत्व पर बहस को जन्म दिया है।
इस समय, अदालत ने जज के दावों के संबंध में कोई बयान जारी नहीं किया है, और मामला जांच के अधीन है।