📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harkamal550
कृषि
डेराबस्सी में पराली जलाने का सिलसिला अब भी जारी, नियंत्रण नहीं
✍️ Amar Ujala · Mohali
🗓 12 अक्टू. 2026, 02:36 AM
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डेराबस्सी के खेतों में पराली जलाना अब भी बेअसर चल रहा है, जिससे क्षेत्र की वायु गुणवत्ता बिगड़ रही है।
पंजाब के मोहाली जिले के डेराबस्सी में फसल कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने की प्रथा अब भी जारी है। किसानों द्वारा फसल के अवशेष को जलाना वायु में बड़ी मात्रा में कणों को छोड़ता है, जिससे वायु गुणवत्ता बिगड़ती है।
क्षेत्रीय वायु मानकों की निगरानी करने वाले उपकरणों ने धुएँ के कारण प्रदूषण स्तर में वृद्धि दर्ज की है, और स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। वैकल्पिक उपायों की कमी के कारण कई किसान अभी भी खुले में पराली जलाने पर निर्भर हैं।
पर्यावरण संगठनों ने बताया है कि यह धुंध पड़ोसी जिलों तक फैलती है और पूरे पंजाब में मौसमी धुंध का कारण बनती है, जिससे दैनिक जीवन पर असर पड़ता है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार और किसानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
हैप्पी सीडर और अवशेष मल्चिंग जैसी मशीनरी आधारित समाधान पर चर्चा चल रही है, परन्तु उनका कार्यान्वयन अभी सीमित है। पराली जलाने का सिलसिला अब भी बेअसर जारी रहने से वायु‑गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना कठिन हो रहा है।
क्षेत्रीय वायु मानकों की निगरानी करने वाले उपकरणों ने धुएँ के कारण प्रदूषण स्तर में वृद्धि दर्ज की है, और स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। वैकल्पिक उपायों की कमी के कारण कई किसान अभी भी खुले में पराली जलाने पर निर्भर हैं।
पर्यावरण संगठनों ने बताया है कि यह धुंध पड़ोसी जिलों तक फैलती है और पूरे पंजाब में मौसमी धुंध का कारण बनती है, जिससे दैनिक जीवन पर असर पड़ता है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार और किसानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
हैप्पी सीडर और अवशेष मल्चिंग जैसी मशीनरी आधारित समाधान पर चर्चा चल रही है, परन्तु उनका कार्यान्वयन अभी सीमित है। पराली जलाने का सिलसिला अब भी बेअसर जारी रहने से वायु‑गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना कठिन हो रहा है।