📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sinjinirx
स्थानीय
उणाकोटी के मुनिमों ने दिवाली के लिए पारंपरिक दीपक मांग पूरी करने हेतु रात्रि-दिन काम किया
✍️ TripuraTimes.com
🗓 02 नव. 2026, 03:38 AM
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उणाकोटी के मुनिम दिवाली के लिए पारंपरिक मिट्टी के दीपक बनाने हेतु रात्रि-दिन काम कर रहे हैं।
उणाकोटी, त्रिपुरा के एक छोटे से शहर में, पारंपरिक मुनिमों ने दिवाली के लिए मिट्टी के दीपकों की बढ़ती मांग को पूरा करने हेतु रात्रि-दिन काम करना शुरू कर दिया है। ये कलाकार सुबह से लेकर देर रात तक शिफ्टों में काम कर रहे हैं।
दिवाली के दौरान दीपक जलाने की परंपरा के कारण, घरों में इन पारंपरिक दीपकों की आवश्यकता में वृद्धि हुई है। मुनिम स्थानीय मिट्टी और प्राचीन विधियों का उपयोग करके हर दीपक को उसी पारंपरिक डिज़ाइन और गुणवत्ता के साथ बना रहे हैं।
स्थानीय अधिकारियों ने इस पहल का समर्थन किया है, यह बताते हुए कि यह प्रयास न केवल शहर की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखता है बल्कि त्योहार के मौसम में रोजगार भी सुनिश्चित करता है। मुनिम उम्मीद करते हैं कि वे सप्ताह के अंत तक दीपकों का उत्पादन पूरा कर लेंगे, ताकि परिवार दिवाली के लिए अपने घरों को सजाने के लिए समय पर दीपक प्राप्त कर सकें।
दिवाली के दौरान दीपक जलाने की परंपरा के कारण, घरों में इन पारंपरिक दीपकों की आवश्यकता में वृद्धि हुई है। मुनिम स्थानीय मिट्टी और प्राचीन विधियों का उपयोग करके हर दीपक को उसी पारंपरिक डिज़ाइन और गुणवत्ता के साथ बना रहे हैं।
स्थानीय अधिकारियों ने इस पहल का समर्थन किया है, यह बताते हुए कि यह प्रयास न केवल शहर की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखता है बल्कि त्योहार के मौसम में रोजगार भी सुनिश्चित करता है। मुनिम उम्मीद करते हैं कि वे सप्ताह के अंत तक दीपकों का उत्पादन पूरा कर लेंगे, ताकि परिवार दिवाली के लिए अपने घरों को सजाने के लिए समय पर दीपक प्राप्त कर सकें।