📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Scalebelow
धर्म
उज्जैन के द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी के बाद पाँच दिन शयन आरती नहीं
✍️ Amar Ujala · Ujjain
🗓 04 सित. 2026, 08:47 AM
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उज्जैन के द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में 4 सितंबर को जन्माष्टमी का विशेष उत्सव होगा, जिसमें बाल कृष्ण की शयन आरती पाँच दिनों तक नहीं की जाएगी।
उज्जैन के प्राचीन द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में 4 सितंबर को जन्माष्टमी का विशेष उत्सव मनाया जाएगा, जिसमें सामान्य अनुष्ठान क्रम से अलग एक व्यवस्था लागू की गई है। भक्तजन बाल स्वरूप में विराजमान भगवान कृष्ण की पूजा‑पाठ और अर्पणों के साथ समारोह में भाग लेंगे।
मंदिर के पुजारी ने बताया कि मुख्य जन्माष्टमी समारोह के बाद पाँच दिनों तक शयन आरती नहीं की जाएगी, जो सामान्यतः बाल कृष्ण को रात में विदा करने के लिये आयोजित की जाती है। यह अस्थायी विराम कृष्ण के बाल्यकाल के लीला को विशेष महत्व देने के लिये किया गया है।
मंदिर प्रबंधन ने स्थानीय व आस‑पास के क्षेत्रों से आने वाले बड़े संख्यक श्रद्धालुओं की उम्मीद जताई है, जो इस अनोखे पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखेंगे। यह आयोजन उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत को उजागर करते हुए क्षेत्रीय धार्मिक परम्पराओं को संजोने में मंदिर की भूमिका को रेखांकित करता है।
अधिकारियों ने कहा कि अन्य सभी दैनिक अनुष्ठान सामान्य रूप से जारी रहेंगे और भीड़ नियंत्रण के लिये सुरक्षा उपाय किए गए हैं। शयन आरती के बिना पाँच‑दिन का काल 9 सितंबर को समाप्त होगा, जिसके बाद नियमित रात्री पूजा फिर से शुरू होगी।
मंदिर के पुजारी ने बताया कि मुख्य जन्माष्टमी समारोह के बाद पाँच दिनों तक शयन आरती नहीं की जाएगी, जो सामान्यतः बाल कृष्ण को रात में विदा करने के लिये आयोजित की जाती है। यह अस्थायी विराम कृष्ण के बाल्यकाल के लीला को विशेष महत्व देने के लिये किया गया है।
मंदिर प्रबंधन ने स्थानीय व आस‑पास के क्षेत्रों से आने वाले बड़े संख्यक श्रद्धालुओं की उम्मीद जताई है, जो इस अनोखे पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखेंगे। यह आयोजन उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत को उजागर करते हुए क्षेत्रीय धार्मिक परम्पराओं को संजोने में मंदिर की भूमिका को रेखांकित करता है।
अधिकारियों ने कहा कि अन्य सभी दैनिक अनुष्ठान सामान्य रूप से जारी रहेंगे और भीड़ नियंत्रण के लिये सुरक्षा उपाय किए गए हैं। शयन आरती के बिना पाँच‑दिन का काल 9 सितंबर को समाप्त होगा, जिसके बाद नियमित रात्री पूजा फिर से शुरू होगी।