📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bernard Gagnon
राजनीति
उज्जैन के 11 मंदिरों के लिए 800 करोड़ का टेम्पल बॉन्ड, राजनीतिक उथल-पुथल
✍️ Amar Ujala · Ujjain
🗓 24 अक्टू. 2026, 06:01 PM
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मध्य प्रदेश सरकार उज्जैन के 11 मंदिरों के नवीनीकरण के लिए 800 करोड़ रुपये के टेम्पल बॉन्ड जारी करने की योजना बना रही है, जिससे राजनीतिक उथल-पुथल छिड़ गई है।
मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन के ग्यारह ऐतिहासिक मंदिरों के नवीनीकरण, बुनियादी ढाँचे के सुधार और धरोहर संरक्षण के लिये लगभग 800 करोड़ रुपये जुटाने हेतु विशेष "टेम्पल बॉन्ड" योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत बांड जारी कर प्राप्त राशि का उपयोग मंदिरों की मरम्मत और सुविधाओं के उन्नयन में किया जाएगा।
पर्यायवाचक दलों ने इस प्रस्ताव की तीखी आलोचना की है, कहकर कि सार्वजनिक ऋण को धार्मिक संस्थानों के लिये उपयोग करना धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के विरुद्ध है और राज्य की वित्तीय स्थिरता को खतरा हो सकता है। उन्होंने इस कदम को साम्प्रदायिक पक्षपात का संकेत बताया है।
वित्त विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि बांड को बाजार‑संबंधी प्रतिभूतियों के रूप में संरचित किया जाएगा और इसकी पुनर्भुगतान योजना में मंदिर पर्यटन से अपेक्षित आय को प्रमुख स्रोत माना गया है। दो महीने के भीतर आवश्यक नियामक मंजूरी मिलने पर बांड जारी करने की तैयारी है।
पहले भी कुछ राज्यों ने धार्मिक संपत्तियों को वित्तीय साधन बनाने की कोशिश की है, परंतु उनका प्रभाव सीमित रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो यह विरासत‑आधारित वित्त पोषण का एक नया मॉडल बन सकता है, परन्तु राजनीतिक विरोध इसे विलंबित या पुनः रूपांतरित कर सकता है।
पर्यायवाचक दलों ने इस प्रस्ताव की तीखी आलोचना की है, कहकर कि सार्वजनिक ऋण को धार्मिक संस्थानों के लिये उपयोग करना धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के विरुद्ध है और राज्य की वित्तीय स्थिरता को खतरा हो सकता है। उन्होंने इस कदम को साम्प्रदायिक पक्षपात का संकेत बताया है।
वित्त विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि बांड को बाजार‑संबंधी प्रतिभूतियों के रूप में संरचित किया जाएगा और इसकी पुनर्भुगतान योजना में मंदिर पर्यटन से अपेक्षित आय को प्रमुख स्रोत माना गया है। दो महीने के भीतर आवश्यक नियामक मंजूरी मिलने पर बांड जारी करने की तैयारी है।
पहले भी कुछ राज्यों ने धार्मिक संपत्तियों को वित्तीय साधन बनाने की कोशिश की है, परंतु उनका प्रभाव सीमित रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो यह विरासत‑आधारित वित्त पोषण का एक नया मॉडल बन सकता है, परन्तु राजनीतिक विरोध इसे विलंबित या पुनः रूपांतरित कर सकता है।