📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Shealeah Craighead
राजनीति
ट्रम्प ने 60‑दिन की ग्रेस अवधि को निशाना बनाया: H‑1B वर्कर्स पर प्रभाव
✍️ The Times of India
🗓 09 अग. 2026, 07:41 AM
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ट्रम्प प्रशासन ने 60‑दिन की ग्रेस अवधि को समाप्त करने की योजना बनाई है, जिससे H‑1B वर्कर्स को नई नौकरी खोजते समय अमेरिका में रहने की अनुमति नहीं रहेगी।
ट्रम्प प्रशासन ने एक नीति परिवर्तन की घोषणा की है जो वर्तमान में H‑1B वर्कर्स के लिए उपलब्ध 60‑दिन की ग्रेस अवधि को समाप्त कर देगा। यह अवधि उन विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में रहने की अनुमति देती है जो अपनी नौकरी खो देते हैं, ताकि वे नई नौकरी खोज सकें या अपनी इमिग्रेशन स्थिति बदल सकें।
वर्तमान नियम के तहत, नौकरी खोने के बाद H‑1B धारक 60 दिनों तक देश में रह सकते हैं। यह समयावधि उन्हें नया प्रायोजक खोजने या किसी अन्य वीज़ा श्रेणी में परिवर्तन करने के लिए महत्वपूर्ण बफ़र प्रदान करती है।
प्रस्तावित परिवर्तन के अनुसार, कर्मचारियों को नौकरी खोने के तुरंत बाद अमेरिका छोड़ना पड़ेगा या बहुत कम समय में नया नियोक्ता ढूंढना होगा। इमिग्रेशन समर्थक चेतावनी देते हैं कि यह कदम हजारों कुशल पेशेवरों के लिए अनिश्चितता पैदा कर सकता है और अमेरिका के प्रौद्योगिकी व शोध क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह नीति अदालत में चुनौती का सामना कर सकती है, क्योंकि यह मौजूदा इमिग्रेशन कानूनों और अंतरराष्ट्रीय श्रम समझौतों के साथ टकरा सकती है। प्रशासन ने अभी तक विस्तृत कार्यान्वयन योजना का विवरण नहीं दिया है, जिससे हितधारक आगे की स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।
वर्तमान नियम के तहत, नौकरी खोने के बाद H‑1B धारक 60 दिनों तक देश में रह सकते हैं। यह समयावधि उन्हें नया प्रायोजक खोजने या किसी अन्य वीज़ा श्रेणी में परिवर्तन करने के लिए महत्वपूर्ण बफ़र प्रदान करती है।
प्रस्तावित परिवर्तन के अनुसार, कर्मचारियों को नौकरी खोने के तुरंत बाद अमेरिका छोड़ना पड़ेगा या बहुत कम समय में नया नियोक्ता ढूंढना होगा। इमिग्रेशन समर्थक चेतावनी देते हैं कि यह कदम हजारों कुशल पेशेवरों के लिए अनिश्चितता पैदा कर सकता है और अमेरिका के प्रौद्योगिकी व शोध क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह नीति अदालत में चुनौती का सामना कर सकती है, क्योंकि यह मौजूदा इमिग्रेशन कानूनों और अंतरराष्ट्रीय श्रम समझौतों के साथ टकरा सकती है। प्रशासन ने अभी तक विस्तृत कार्यान्वयन योजना का विवरण नहीं दिया है, जिससे हितधारक आगे की स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।