📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Dr. Biswajeet Pattanayak
विदेश
ट्रिपुरा की टीएसईसीएल ने 10 वर्षों में बांग्लादेश को बिजली सप्लाई से 1,165.37 करोड़ रुपये कमाए
✍️ economictimes.com
🗓 12 अग. 2026, 10:03 PM
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ट्रिपुरा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (टीएसईसीएल) ने 10 वर्षों में बांग्लादेश को बिजली निर्यात कर ₹1,165.37 करोड़ रुपये कमाए, आर्थिक टाइम्स के अनुसार।
ट्रिपुरा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (टीएसईसीएल) ने पिछले दस वर्षों में बांग्लादेश को बिजली सप्लाई से ₹1,165.37 करोड़ रुपये की कुल कमाई की है, जैसा कि आर्थिक टाइम्स के एक लेख में बताया गया है।
यह आंकड़ा ट्रिपुरा और बांग्लादेश के बीच चल रहे क्रॉस‑बॉर्डर पावर एग्रीमेंट को दर्शाता है, जो क्षेत्र की ऊर्जा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। अतिरिक्त बिजली निर्यात करके, टीएसईसीएल ने न केवल महत्वपूर्ण राजस्व उत्पन्न किया है बल्कि ऊर्जा सहयोग के माध्यम से कूटनीतिक संबंधों को भी मजबूत किया है।
औसतन, बांग्लादेश के अनुबंधों से वार्षिक राजस्व लगभग ₹116 करोड़ रहा है, जिसमें लोड प्रबंधन और बाजार स्थितियों के आधार पर टैरिफ समायोजन के लिए लचीलापन है। यह व्यवस्था समय‑समय पर नवीनीकृत की गई है, जो इसके पारस्परिक लाभ को दर्शाती है।
यह कमाई ट्रिपुरा के वित्तीय स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए तैयार है, जिससे बुनियादी ढांचे के विकास और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि निरंतर साझेदारी उत्तरी पूर्वी क्षेत्र में आगे के ऊर्जा परियोजनाओं के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
यह आंकड़ा ट्रिपुरा और बांग्लादेश के बीच चल रहे क्रॉस‑बॉर्डर पावर एग्रीमेंट को दर्शाता है, जो क्षेत्र की ऊर्जा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। अतिरिक्त बिजली निर्यात करके, टीएसईसीएल ने न केवल महत्वपूर्ण राजस्व उत्पन्न किया है बल्कि ऊर्जा सहयोग के माध्यम से कूटनीतिक संबंधों को भी मजबूत किया है।
औसतन, बांग्लादेश के अनुबंधों से वार्षिक राजस्व लगभग ₹116 करोड़ रहा है, जिसमें लोड प्रबंधन और बाजार स्थितियों के आधार पर टैरिफ समायोजन के लिए लचीलापन है। यह व्यवस्था समय‑समय पर नवीनीकृत की गई है, जो इसके पारस्परिक लाभ को दर्शाती है।
यह कमाई ट्रिपुरा के वित्तीय स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए तैयार है, जिससे बुनियादी ढांचे के विकास और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि निरंतर साझेदारी उत्तरी पूर्वी क्षेत्र में आगे के ऊर्जा परियोजनाओं के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकती है।