दीपावली पर तालाबों और नदियो ं पर जुट े लोगः अर्घ्य अर्पित कर छांट भरने की परंपरा निभाई, पूर्वजों को याद किया
सवाई माधोपुर मे ं दीपावली के अवसर पर कस्बे और
आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों मे ं गुर्जर समाज और कई समुदायो ं ने पारंपरिक रूप से अपने पूर्वजों को याद करते हुए छांट भरने की रस्म पूरी की। यह परंपरा हर साल दीपावली की बड़ी अमावस्या के दिन निभाई जाती है, जिसमें लोग अपने पूर्वजों के लिए श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
रावण का वध करने के बाद भगवान श्री राम ने सबस े पहले अयोध्या जाकर अपने पूर्वजों का दर्पण किया था। गुर्जर समाज भी भगवान राम के वंशज है। ऐस े मे ं दीपावली मनान े से पहले अमावस्या के दिन यह परंपरा निभाई जाती है।
गुर्जर समाज धर्मशाला के अध्यक्ष रामकिशन मुकुल ने बताया- दीपावली की बड़ी अमावस्या को समाज के लोग सामूहिक रूप से तालाबों, नदियो ं और अन्य जल स्रोतों पर जमा होकर छांट भर की रस्म निभाते हैं। इस दौरान लोग रस्सी जैसी बेल को सामूहिक रूप से पकड़कर जल में अर्घ्य अर्पित करते हैं और पूर्वजों को याद करते हैं।
आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों मे ं गुर्जर समाज और कई समुदायो ं ने पारंपरिक रूप से अपने पूर्वजों को याद करते हुए छांट भरने की रस्म पूरी की। यह परंपरा हर साल दीपावली की बड़ी अमावस्या के दिन निभाई जाती है, जिसमें लोग अपने पूर्वजों के लिए श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
रावण का वध करने के बाद भगवान श्री राम ने सबस े पहले अयोध्या जाकर अपने पूर्वजों का दर्पण किया था। गुर्जर समाज भी भगवान राम के वंशज है। ऐस े मे ं दीपावली मनान े से पहले अमावस्या के दिन यह परंपरा निभाई जाती है।
गुर्जर समाज धर्मशाला के अध्यक्ष रामकिशन मुकुल ने बताया- दीपावली की बड़ी अमावस्या को समाज के लोग सामूहिक रूप से तालाबों, नदियो ं और अन्य जल स्रोतों पर जमा होकर छांट भर की रस्म निभाते हैं। इस दौरान लोग रस्सी जैसी बेल को सामूहिक रूप से पकड़कर जल में अर्घ्य अर्पित करते हैं और पूर्वजों को याद करते हैं।