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30 Sep 2026•
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Sarkari Yojana

दिल्ली की पानी-सीवर व्यवस्था के कायाकल्प पर ₹17,970 करोड़ की मुहर

✍️ Reporter: Rajeev Kumar Sharma 🗓 30 Sep 2026, 08:52 PM 👁 26
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₹17,970 करोड़ से बदलेगी दिल्ली की पानी-सीवर व्यवस्था!

नई दिल्ली। दिल्ली की पानी और सीवर व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में दिल्ली जल बोर्ड ने बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने शहर के सीवर नेटवर्क के व्यापक कायाकल्प के लिए करीब ₹17,970 करोड़ के 10 वर्षीय कार्यक्रम को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके तहत दिल्ली को आठ जोन में बांटकर प्रत्येक जोन में एक ऑपरेटर को सीवर लाइनों, मैनहोल, पंपिंग स्टेशनों और शिकायतों के निस्तारण की पूरी जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव है।
इस ‘वन जोन-वन ऑपरेटर’ मॉडल का उद्देश्य शिकायत आने के बाद मरम्मत करने की बजाय नियमित और पूर्व नियोजित रखरखाव पर जोर देना है। प्रस्ताव में जियो-टैग्ड निरीक्षण, रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए सेंट्रल कमांड सेंटर तथा सीवर की 100 प्रतिशत मैकेनिकल और रोबोटिक सफाई जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार वर्तमान में करीब 11,212 किलोमीटर सीवर लाइन, 6.68 लाख मैनहोल और 145 पंपिंग स्टेशन 68 विधानसभा क्षेत्रों में संचालित किए जा रहे हैं। नए मॉडल में काम के भुगतान को प्रदर्शन से जोड़ने की योजना है, ताकि शिकायतों का तेजी से समाधान हो और सीवर ओवरफ्लो की समस्या कम हो।
दक्षिण दिल्ली के लिए ₹6,044 करोड़ की जल परियोजना
बोर्ड ने दक्षिण दिल्ली की जलापूर्ति व्यवस्था को बदलने के लिए ₹6,044.05 करोड़ की परियोजना को भी मंजूरी दी है। यह परियोजना करीब 247 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, 13 अंडरग्राउंड रिजर्वायर कमांड एरिया और 12 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेगी तथा लगभग 2.44 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगी। इसमें स्मार्ट मीटर, बल्क फ्लो मीटर और पानी के क्लोरीन व दबाव की रियल-टाइम निगरानी के लिए सेंसर लगाए जाने का प्रस्ताव है।
इन योजनाओं के जरिए जलापूर्ति की निगरानी, पानी की बर्बादी और लीकेज पर नियंत्रण तथा सीवर व्यवस्था की जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया गया है। दिल्ली में सीवर कनेक्शन की कमी अभी भी बड़ी चुनौती है—हाल की DJB जानकारी के मुताबिक करीब 41.3 प्रतिशत घर अभी सीवर नेटवर्क से जुड़े नहीं हैं, जबकि 2028 तक सभी चार करोड़? नहीं, चार मिलियन (40 लाख) घरों को नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य बताया गया है।
यानी आने वाले वर्षों में दिल्ली की जल-सीवर व्यवस्था को पाइपलाइन से लेकर निगरानी और शिकायत निस्तारण तक तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है।
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