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ठेकेदार का भुगतान बजट की कमी के कारण अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि काम पूरा कर चुके ठेकेदार का भुगतान केवल बजट उपलब्ध न होने के आधार पर अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता। कोर्ट ने मुरैना जिले के एक मामले में ₹5 लाख की बकाया राशि 6% वार्षिक ब्याज के साथ चार सप्ताह में जारी करने का निर्देश दिया है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि काम पूरा कर चुके ठेकेदार का भुगतान केवल बजट उपलब्ध न होने के आधार पर अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जा सकता। यह आदेश मुरैना जिले में पोंटून पुल के संयोजन, स्थापना और रखरखाव से जुड़े कार्य के एक मामले में दिया गया है।
मामले में ठेकेदार की ₹5 लाख की बकाया राशि को विभाग द्वारा स्वीकार किया जा चुका था, लेकिन भुगतान बजट की अनुपलब्धता के कारण अटका हुआ था। कोर्ट ने इस स्थिति पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह ठेकेदार को ₹5 लाख की राशि 6% वार्षिक ब्याज के साथ चार सप्ताह के भीतर जारी करे।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि बजट संबंधी प्रशासनिक कठिनाइयों का खामियाजा उस व्यक्ति को नहीं भुगतना चाहिए जिसने अपना कार्य पूर्ण कर लिया है। यह फैसला सरकारी विभागों में लंबित भुगतानों और ठेकेदारों के अधिकारों के संबंध में एक महत्वपूर्ण नज़ीर पेश करता है।
मामले में ठेकेदार की ₹5 लाख की बकाया राशि को विभाग द्वारा स्वीकार किया जा चुका था, लेकिन भुगतान बजट की अनुपलब्धता के कारण अटका हुआ था। कोर्ट ने इस स्थिति पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह ठेकेदार को ₹5 लाख की राशि 6% वार्षिक ब्याज के साथ चार सप्ताह के भीतर जारी करे।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि बजट संबंधी प्रशासनिक कठिनाइयों का खामियाजा उस व्यक्ति को नहीं भुगतना चाहिए जिसने अपना कार्य पूर्ण कर लिया है। यह फैसला सरकारी विभागों में लंबित भुगतानों और ठेकेदारों के अधिकारों के संबंध में एक महत्वपूर्ण नज़ीर पेश करता है।