Politics
ठाकरे बंधुओं का चुनाव आयोग के खिलाफ मुंबई में 'गर्जना मोर्चा', इस्तीफे और SIR प्रक्रिया रद्द करने की मांग
मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे और राकांपा (एसपी) के शरद पवार ने चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त 'गर्जना मोर्चा' निकाला। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया रद्द करने की मांग की है।
मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने चुनाव आयोग के खिलाफ एक संयुक्त 'गर्जना मोर्चा' निकाला। इस प्रदर्शन के माध्यम से दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। इसके साथ ही, उन्होंने 'सिस्टमैटिक वोटर एजुकेशन एंड इलेक्टोरल लिटरेसी' (SVEEP) के तहत प्रस्तावित SIR (Systematic Voter Education and Electoral Literacy) प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की भी मांग की है।
यह संयुक्त मोर्चा, जिसे 'गर्जना मोर्चा' नाम दिया गया, चुनाव आयोग द्वारा हालिया फैसलों और प्रक्रियाओं के प्रति असंतोष व्यक्त करने के लिए आयोजित किया गया था। उद्धव ठाकरे और शरद पवार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने आयोग के कामकाज के तरीके पर गहरी चिंता जताई और इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएं निष्पक्षता से काम नहीं कर रही हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की, उनका आरोप है कि वे सत्ताधारी दल के इशारों पर काम कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग पर जोर दिया गया, जिसके बारे में उनका मानना है कि यह मतदाताओं को प्रभावित करने का एक प्रयास हो सकता है। इस संयुक्त शक्ति प्रदर्शन ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है और आगामी राजनीतिक परिदृश्यों पर इसके प्रभाव देखे जाने की उम्मीद है।
यह संयुक्त मोर्चा, जिसे 'गर्जना मोर्चा' नाम दिया गया, चुनाव आयोग द्वारा हालिया फैसलों और प्रक्रियाओं के प्रति असंतोष व्यक्त करने के लिए आयोजित किया गया था। उद्धव ठाकरे और शरद पवार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने आयोग के कामकाज के तरीके पर गहरी चिंता जताई और इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएं निष्पक्षता से काम नहीं कर रही हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की, उनका आरोप है कि वे सत्ताधारी दल के इशारों पर काम कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग पर जोर दिया गया, जिसके बारे में उनका मानना है कि यह मतदाताओं को प्रभावित करने का एक प्रयास हो सकता है। इस संयुक्त शक्ति प्रदर्शन ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है और आगामी राजनीतिक परिदृश्यों पर इसके प्रभाव देखे जाने की उम्मीद है।