📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
मौसम
तेलंगाना ने एल नीनो से हुए नुकसान के लिए केंद्र से राहत की माँग
✍️ Telangana Today
🗓 02 अक्टू. 2026, 06:46 AM
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तेलंगाना सरकार एल नीनो से हुए नुकसान की भरपाई के लिये केंद्र से वित्तीय सहायता की मांग करेगी।
हैदराबाद, 2 अक्टूबर 2026 – तेलंगाना सरकार ने हालिया एल नीनो‑प्रेरित सूखे से प्रभावित किसानों और अन्य हितधारकों को क्षतिपूर्ति देने हेतु केंद्र सरकार से विशेष अनुदान की मांग करने का इरादा जताया है। मंत्रालय ने बताया कि लगातार उच्च तापमान और अनियमित वर्षा ने प्रमुख जिलों में बोवाई के क्षेत्र को घटा दिया है और फसल उत्पादन में गिरावट आई है।
अधिकारियों के अनुसार, अनुमानित कृषि नुकसान कई सौ करोड़ रुपये तक पहुंचता है, जिससे राज्य ने आपदा राहत ढांचे के तहत एक औपचारिक अनुरोध तैयार किया है। यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा निकट भविष्य में प्रस्तुत किया जाएगा।
यह कदम केंद्र सरकार द्वारा मौसम‑संबंधी आपदाओं से प्रभावित राज्यों के लिए तैयार किए जा रहे सहायता योजनाओं की समीक्षा के साथ आया है। तेलंगाना आशा करता है कि अनुरोध को शीघ्र स्वीकृति मिलेगी, जिससे समय पर राहत वितरण संभव हो सके और ग्रामीण समुदायों में आगे की कठिनाइयों को रोका जा सके।
राज्य के कृषि अधिकारी स्थानीय पंचायतों के साथ मिलकर सबसे अधिक प्रभावित गांवों की पहचान कर रहे हैं और संभावित फंड को सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाने की व्यवस्था कर रहे हैं।
यह मांग भारतीय राज्यों में जलवायु परिवर्तन के आर्थिक प्रभाव और समन्वित वित्तीय प्रतिक्रिया की आवश्यकता को उजागर करती है।
अधिकारियों के अनुसार, अनुमानित कृषि नुकसान कई सौ करोड़ रुपये तक पहुंचता है, जिससे राज्य ने आपदा राहत ढांचे के तहत एक औपचारिक अनुरोध तैयार किया है। यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा निकट भविष्य में प्रस्तुत किया जाएगा।
यह कदम केंद्र सरकार द्वारा मौसम‑संबंधी आपदाओं से प्रभावित राज्यों के लिए तैयार किए जा रहे सहायता योजनाओं की समीक्षा के साथ आया है। तेलंगाना आशा करता है कि अनुरोध को शीघ्र स्वीकृति मिलेगी, जिससे समय पर राहत वितरण संभव हो सके और ग्रामीण समुदायों में आगे की कठिनाइयों को रोका जा सके।
राज्य के कृषि अधिकारी स्थानीय पंचायतों के साथ मिलकर सबसे अधिक प्रभावित गांवों की पहचान कर रहे हैं और संभावित फंड को सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाने की व्यवस्था कर रहे हैं।
यह मांग भारतीय राज्यों में जलवायु परिवर्तन के आर्थिक प्रभाव और समन्वित वित्तीय प्रतिक्रिया की आवश्यकता को उजागर करती है।