📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Mpamidimarthi
स्वास्थ्य
तेलंगाना में नर्सों की कमी, WHO मानक से काफी नीचे
✍️ The Times of India
🗓 27 अग. 2026, 06:02 AM
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एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि तेलंगाना में नर्स‑जनसंख्या अनुपात WHO के अनुशंसित न्यूनतम स्तर से काफी नीचे है, जिससे स्वास्थ्य‑सेवा क्षमता को लेकर चिंता बढ़ी है।
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना में नर्सों की गंभीर कमी है, जहाँ नर्स‑जनसंख्या अनुपात विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित मानक से काफी पीछे है। WHO ने प्रति 1,000 लोगों पर कम से कम एक नर्स की सिफ़ारिश की है, जिसे राज्य अभी तक पूरा नहीं कर पाया है।
यह कमी विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूदा सीमित संसाधनों के साथ अस्पतालों की सेवाओं को प्रभावित कर रही है। रोगियों को लंबी प्रतीक्षा अवधि और विशेष देखभाल तक सीमित पहुंच का सामना करना पड़ सकता है, जिससे इस अंतर को जल्द से जल्द पाटने की आवश्यकता बढ़ रही है।
राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस अंतर को स्वीकार किया है और भर्ती अभियानों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और प्रोत्साहन योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं ताकि अधिक नर्सों को आकर्षित किया जा सके और मौजूदा कर्मियों को बनाए रखा जा सके। जबकि ठोस नीतियों पर अभी चर्चा चल रही है, अधिकारियों ने नर्सिंग बल को मजबूत करने को स्वास्थ्य परिणाम सुधारने की प्राथमिकता बताया है।
नर्सिंग संघों सहित कई हितधारकों ने इन योजनाओं के तेज़ कार्यान्वयन की मांग की है, क्योंकि निरंतर कमी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की मौजूदा चुनौतियों को और बढ़ा सकती है।
यह कमी विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूदा सीमित संसाधनों के साथ अस्पतालों की सेवाओं को प्रभावित कर रही है। रोगियों को लंबी प्रतीक्षा अवधि और विशेष देखभाल तक सीमित पहुंच का सामना करना पड़ सकता है, जिससे इस अंतर को जल्द से जल्द पाटने की आवश्यकता बढ़ रही है।
राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस अंतर को स्वीकार किया है और भर्ती अभियानों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और प्रोत्साहन योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं ताकि अधिक नर्सों को आकर्षित किया जा सके और मौजूदा कर्मियों को बनाए रखा जा सके। जबकि ठोस नीतियों पर अभी चर्चा चल रही है, अधिकारियों ने नर्सिंग बल को मजबूत करने को स्वास्थ्य परिणाम सुधारने की प्राथमिकता बताया है।
नर्सिंग संघों सहित कई हितधारकों ने इन योजनाओं के तेज़ कार्यान्वयन की मांग की है, क्योंकि निरंतर कमी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की मौजूदा चुनौतियों को और बढ़ा सकती है।