📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Dr Vikramjit Kakati
स्थानीय
टिहरी बांध विस्थापितों को 26 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार
✍️ Amar Ujala · Patiala
🗓 29 अग. 2026, 07:03 PM
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टिहरी बांध परियोजना से विस्थापित हजारों परिवारों को अब भी पानी, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी बुनियादी सेवाओं की कमी झेलनी पड़ रही है।
टिहरी बांध का निर्माण 1990 के दशक के मध्य में पूरा हुआ, जिससे उत्तराखंड के तेहरी गरहवाल जिले के कई गांवों के निवासियों को स्थानांतरित करना पड़ा। अब 26 साल बाद भी विस्थापित लोग अस्थायी बस्तियों में रह रहे हैं, जहाँ साफ़ पीने का पानी, स्थिर बिजली और पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएँ सीमित हैं।
स्थानीय प्रशासन ने कई पुनर्वास योजनाएँ शुरू की हैं, पर कई परिवारों का कहना है कि वादे किए गए घर अधूरे हैं या स्कूल‑बाजार से दूर स्थित हैं। उचित सड़कों की कमी उनके आजीविका और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच को और कठिन बनाती है।
समुदाय समूह और गैर‑सरकारी संगठनों ने राज्य सरकार से बुनियादी ढाँचे के कार्यों को तेज़ करने की मांग की है। कुछ सुधार देखे गए हैं, पर पुनर्वास की गति अभी भी धीमी है, जिससे विस्थापित समुदाय को दीर्घकालिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
यह स्थिति हिमालयी जलविद्युत परियोजनाओं के सामाजिक प्रभाव को उजागर करती है और पुनर्वास एवं आजीविका पुनर्स्थापना पर निरंतर नीति‑ध्यान की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
स्थानीय प्रशासन ने कई पुनर्वास योजनाएँ शुरू की हैं, पर कई परिवारों का कहना है कि वादे किए गए घर अधूरे हैं या स्कूल‑बाजार से दूर स्थित हैं। उचित सड़कों की कमी उनके आजीविका और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच को और कठिन बनाती है।
समुदाय समूह और गैर‑सरकारी संगठनों ने राज्य सरकार से बुनियादी ढाँचे के कार्यों को तेज़ करने की मांग की है। कुछ सुधार देखे गए हैं, पर पुनर्वास की गति अभी भी धीमी है, जिससे विस्थापित समुदाय को दीर्घकालिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
यह स्थिति हिमालयी जलविद्युत परियोजनाओं के सामाजिक प्रभाव को उजागर करती है और पुनर्वास एवं आजीविका पुनर्स्थापना पर निरंतर नीति‑ध्यान की आवश्यकता को रेखांकित करती है।