Health
तरांदुल में 570 हितग्राहियों को मिला लाभ, नक्सल प्रभावित गांव में पहली बार पहुंचा जिला स्तरीय सेवा सेतु शिविर
जहां कभी नक्सल गतिविधियों के साए में पहुंचना मुश्किल था, वहां अब सरकार की योजनाएं पहुंच रही हैं। भानुप्रतापपुर ब्लॉक के सुदूर ग्राम तरांदुल में पहली बार जिला स्तरीय सेवा सेतु सह मेगा स्वास्थ्य शिविर लगाया गया, जहां एक ही जगह पर 570 ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिला। तरांदुल से विकास की नई तस्वीर सामने आई है।
जहां कभी नक्सल गतिविधियों के साए में पहुंचना मुश्किल था, वहां अब सरकार की योजनाएं पहुंच रही हैं।
भानुप्रतापपुर ब्लॉक के सुदूर ग्राम तरांदुल में पहली बार जिला स्तरीय सेवा सेतु सह मेगा स्वास्थ्य शिविर लगाया गया, जहां एक ही जगह पर 570 ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिला।
तरांदुल से विकास की नई तस्वीर सामने आई है।
जिला पंचायत अध्यक्ष किरण नेरेटी ने ग्रामीणों से स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनने और लखपति दीदी बनने का आह्वान किया।
वहीं कलेक्टर कुन्दन कुमार ने तरांदुल पहुंचकर अपने पुराने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एसडीएम रहते नक्सल गतिविधियों के कारण यहां आना संभव नहीं हो पाया था, लेकिन आज कलेक्टर के रूप में इसी गांव में पहुंचना क्षेत्र में आए बदलाव की बड़ी तस्वीर है।
अब फोकस सिर्फ सुरक्षा नहीं, विकास पर भी!
कलेक्टर ने जर्जर आंगनबाड़ी भवनों की 15 दिनों में स्वीकृति, स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष, पीडीएस भवन और धान खरीदी चबूतरों के निर्माण को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए।
शिविर में किसे क्या मिला?
➡️ 160 हितग्राहियों को स्वामित्व योजना का लाभ
➡️ 48 को जाति प्रमाण पत्र
➡️ 36 को बी-1 की प्रतियां
➡️ 5 को राशन कार्ड
➡️ 20 महिलाओं को लखपति दीदी प्रमाण पत्र
➡️ 2 बच्चों को ₹20-₹20 हजार की सहायता
➡️ 85 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड
➡️ साथ ही जॉब कार्ड, आयुष्मान कार्ड, फलदार पौधे, मछली जाल और सहायक उपकरण भी वितरित किए गए।
तरांदुल की कहानी अब सिर्फ नक्सल प्रभावित क्षेत्र की नहीं… बल्कि बदलते बस्तर और विकास की ओर बढ़ते गांव की कहानी बनती नजर आ रही है।
भानुप्रतापपुर ब्लॉक के सुदूर ग्राम तरांदुल में पहली बार जिला स्तरीय सेवा सेतु सह मेगा स्वास्थ्य शिविर लगाया गया, जहां एक ही जगह पर 570 ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिला।
तरांदुल से विकास की नई तस्वीर सामने आई है।
जिला पंचायत अध्यक्ष किरण नेरेटी ने ग्रामीणों से स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनने और लखपति दीदी बनने का आह्वान किया।
वहीं कलेक्टर कुन्दन कुमार ने तरांदुल पहुंचकर अपने पुराने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एसडीएम रहते नक्सल गतिविधियों के कारण यहां आना संभव नहीं हो पाया था, लेकिन आज कलेक्टर के रूप में इसी गांव में पहुंचना क्षेत्र में आए बदलाव की बड़ी तस्वीर है।
अब फोकस सिर्फ सुरक्षा नहीं, विकास पर भी!
कलेक्टर ने जर्जर आंगनबाड़ी भवनों की 15 दिनों में स्वीकृति, स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष, पीडीएस भवन और धान खरीदी चबूतरों के निर्माण को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए।
शिविर में किसे क्या मिला?
➡️ 160 हितग्राहियों को स्वामित्व योजना का लाभ
➡️ 48 को जाति प्रमाण पत्र
➡️ 36 को बी-1 की प्रतियां
➡️ 5 को राशन कार्ड
➡️ 20 महिलाओं को लखपति दीदी प्रमाण पत्र
➡️ 2 बच्चों को ₹20-₹20 हजार की सहायता
➡️ 85 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड
➡️ साथ ही जॉब कार्ड, आयुष्मान कार्ड, फलदार पौधे, मछली जाल और सहायक उपकरण भी वितरित किए गए।
तरांदुल की कहानी अब सिर्फ नक्सल प्रभावित क्षेत्र की नहीं… बल्कि बदलते बस्तर और विकास की ओर बढ़ते गांव की कहानी बनती नजर आ रही है।