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15 अक्टू. 2026•
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ट्रैक्टर चोरी के फर्जी मुकदमे में गिरफ्तारी का मामला: अब CBCID करेगी जांच

ट्रैक्टर चोरी के फर्जी मुकदमे में गिरफ्तारी का मामला: अब CBCID करेगी जांच

✍️ रिपोर्टर: ashif 🗓 15 अक्टू. 2026, 10:24 AM 👁 12
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का आदेश, तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
पीड़ित की याचिका पर अदालत सख्त, विवेचना में गंभीर लापरवाही पर जताई नाराजगी

अमेठी। शिवरतनगंज थाने की पुलिस पर रिट वापस लेने का दबाव बनाने और कथित तौर पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजने के गंभीर आरोपों से जुड़े मामले में अब सीबीसीआईडी जांच करेगी। पीड़ित की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मामले की जांच दूसरी एजेंसी से कराने का आदेश दिया है। अदालत ने विवेचना में बरती गई गंभीर लापरवाही पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इस आदेश के बाद मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत संबंधित पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच का रास्ता खुल गया है।
मामला अमेठी जिले के खेखरूआ गांव का है। गांव निवासी शकील पुत्र अजमत अली के मुताबिक, 23 मई 2023 को पुलिस ने उसकी गैरमौजूदगी में घर पर छापेमारी कर उसके बहनोई अनीस अहमद के नाम पंजीकृत ट्रैक्टर को उठा लिया। आरोप है कि उसी शाम पूछताछ के बहाने पुलिस उसे भी अपने साथ ले गई।
शकील का आरोप है कि गांव के खलिहान से कब्जा हटवाने के संबंध में उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें जिले और तहसील के अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया था। आरोप है कि पुलिस उस याचिका को वापस लेने का दबाव बना रही थी। शकील के मुताबिक, याचिका वापस लेने से इनकार करने पर उसे कथित रूप से झूठे मुकदमे में फंसाने की साजिश रची गई।
आरोप है कि अगले दिन गांव के ही उमाशंकर पुत्र सत्यनाम की तहरीर पर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और तीसरे दिन उसे जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए शकील ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसी बीच पुलिस ने मामले में गंभीर धाराओं में आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया।
33 दिन जेल में रहने का दावा, अदालत तक पहुंचा मामला
पीड़ित के अधिवक्ता संदीप कुमार तिवारी के अनुसार, कथित फर्जी गिरफ्तारी के कारण शकील को 33 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने बताया कि जिस ट्रैक्टर को चोरी का बताया गया था, वह शकील के बहनोई अनीस अहमद के नाम पंजीकृत था। ट्रैक्टर को सिविल कोर्ट ने भी अनीस अहमद के पक्ष में रिलीज करने का आदेश दिया था।
अधिवक्ता के मुताबिक, गिरफ्तारी वाले दिन शकील की पत्नी नब्ज बानो ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में पति पर याचिका वापस लेने का दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया गया था। इस पहलू को भी अदालत के संज्ञान में लाया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने विवेचना में गंभीर लापरवाही पर तल्ख टिप्पणी करते हुए अन्य जांच एजेंसी से जांच कराने का आदेश दिया। अगली सुनवाई के लिए 21 दिसंबर की तारीख निर्धारित की गई है।
मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष अमरेंद्र सिंह वर्तमान में जायस कोतवाली में तैनात हैं, जबकि विवेचक रहे उपनिरीक्षक राम बहादुर सिंह सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता का कहना है कि सीबीसीआईडी जांच में कथित घटना से जुड़े पुलिसकर्मियों, अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। अब निगाहें जांच एजेंसी की कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे पूरे प्रकरण की परिस्थितियां और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
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