📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Michael Gäbler
बिज़नेस
तमिलनाडु में शराब की दुकानों का डिजिटलकरण, 1 सितंबर से लागू
✍️ India Today
🗓 28 अग. 2026, 12:18 PM
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तमिलनाडु सरकार 1 सितंबर से सभी शराब की दुकानों को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर ले जा रही है, जिसमें ऑनलाइन लाइसेंस, नकद‑रहित लेन‑देन और वास्तविक‑समय इन्वेंट्री निगरानी शामिल है।
तमिलनाडु सरकार ने घोषणा की है कि 1 सितंबर से राज्य की सभी लाइसेंसधारी शराब की दुकानों को डिजिटल प्रणाली के माध्यम से चलाया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत दुकानदारों को इलेक्ट्रॉनिक लाइसेंस प्राप्त करना होगा, बिक्री का रिकॉर्ड एक केंद्रीकृत पोर्टल पर रखना होगा और नकद के बजाय डेबिट, क्रेडिट या मोबाइल वॉलेट से भुगतान स्वीकार करना होगा।
यह कदम अवैध बिक्री को रोकने, कर अनुपालन बढ़ाने और उपभोक्ताओं को पारदर्शी मूल्य प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है। स्टॉक स्तर की वास्तविक‑समय जानकारी भी दुकानों द्वारा पोर्टल पर अपलोड की जाएगी, जिससे प्राधिकारियों को आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी और किसी भी अनियमितता का तुरंत पता चल सकेगा।
डिजिटल प्रणाली का कार्यान्वयन तमिलनाडु एक्साइट विभाग की देखरेख में होगा, जो दुकानदारों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित करेगा और तकनीकी समस्याओं के समाधान हेतु हेल्प‑डेस्क स्थापित करेगा। अनिवार्य अवधि के बाद अनुपालन न करने पर जुर्माना या लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
यह डिजिटल परिवर्तन राज्य की व्यापक ई‑गवर्नेंस पहलों के साथ मेल खाता है, जिसका लक्ष्य पारंपरिक क्षेत्रों को आधुनिक बनाना और राजस्व संग्रह को बढ़ाना है, बिना मौजूदा आपूर्ति व्यवस्था को बाधित किए।
यह कदम अवैध बिक्री को रोकने, कर अनुपालन बढ़ाने और उपभोक्ताओं को पारदर्शी मूल्य प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है। स्टॉक स्तर की वास्तविक‑समय जानकारी भी दुकानों द्वारा पोर्टल पर अपलोड की जाएगी, जिससे प्राधिकारियों को आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी और किसी भी अनियमितता का तुरंत पता चल सकेगा।
डिजिटल प्रणाली का कार्यान्वयन तमिलनाडु एक्साइट विभाग की देखरेख में होगा, जो दुकानदारों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित करेगा और तकनीकी समस्याओं के समाधान हेतु हेल्प‑डेस्क स्थापित करेगा। अनिवार्य अवधि के बाद अनुपालन न करने पर जुर्माना या लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
यह डिजिटल परिवर्तन राज्य की व्यापक ई‑गवर्नेंस पहलों के साथ मेल खाता है, जिसका लक्ष्य पारंपरिक क्षेत्रों को आधुनिक बनाना और राजस्व संग्रह को बढ़ाना है, बिना मौजूदा आपूर्ति व्यवस्था को बाधित किए।