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टीकमगढ़ में डीएपी खाद की पहली रेलवे रैक पहुंची, दूसरी जल्द आने वाली
टीकमगढ़ जिले में डीएपी खाद की एक रेलवे रैक पहुंची है, जिससे किसानों को रबी फसलों के लिए आवश्यक उर्वरक समय पर उपलब्ध होगा। कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया को तेज करने और छोटे किसानों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
टीकमगढ़ जिले में डीएपी खाद की एक रेलवे रैक पहुंच चुकी है, जबकि दूसरी रैक जल्द आने की संभावना है। इस कदम से जिले में खाद की उपलब्धता बढ़ेगी और किसानों को रबी फसलों की बोवनी के लिए आवश्यक उर्वरक समय पर मिल सकेगा।
कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय ने प्रातः मार्कफेड कार्यालय पहुंचकर उर्वरक कंपनी एवं मार्कफेड के अधिकारियों से जिले में खाद की उपलब्धता, किसानों की मांग तथा ई-विकास पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। उन्होंने रेलवे रैक पहुंचने के बाद खाद को किसानों के लिए ऑनलाइन बुकिंग हेतु उपलब्ध कराने में लगने वाले समय और संबंधित प्रक्रियाओं की विस्तार से समीक्षा की।
ऑनलाइन बुकिंग के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, रेलवे रैक पहुंचने के बाद खाद को उतारकर संबंधित गोदामों अथवा सहकारी संस्थाओं तक पहुंचाया जाता है। फिर प्राप्त खाद की वास्तविक मात्रा का मिलान कर मार्कफेड पोर्टल पर स्टॉक प्रविष्टियां दर्ज की जाती हैं, और भारत सरकार के पीएफएमएस पोर्टल पर भी मिलान किया जाता है। इन प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद ही खाद ई-विकास पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग के लिए प्रदर्शित होता है, जिसके अनुसार डीएपी खाद लगभग एक सप्ताह में उपलब्ध होने की संभावना है।
कलेक्टर ने किसानों से अपील की है कि वे खाद की ऑनलाइन बुकिंग करते समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें और विशेष रूप से छोटे किसानों को तकनीकी सहायता और व्हाट्सऐप तथा सीएससी ऑपरेटरों की मदद से बुकिंग करने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही डीएपी के विकल्प के रूप में टीएसपी एवं एनपीके उर्वरकों के उपयोग पर भी विचार करने की अपील की गई है, ताकि किसानों को संतुलित एवं आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक मिल सके।
कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय ने प्रातः मार्कफेड कार्यालय पहुंचकर उर्वरक कंपनी एवं मार्कफेड के अधिकारियों से जिले में खाद की उपलब्धता, किसानों की मांग तथा ई-विकास पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। उन्होंने रेलवे रैक पहुंचने के बाद खाद को किसानों के लिए ऑनलाइन बुकिंग हेतु उपलब्ध कराने में लगने वाले समय और संबंधित प्रक्रियाओं की विस्तार से समीक्षा की।
ऑनलाइन बुकिंग के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, रेलवे रैक पहुंचने के बाद खाद को उतारकर संबंधित गोदामों अथवा सहकारी संस्थाओं तक पहुंचाया जाता है। फिर प्राप्त खाद की वास्तविक मात्रा का मिलान कर मार्कफेड पोर्टल पर स्टॉक प्रविष्टियां दर्ज की जाती हैं, और भारत सरकार के पीएफएमएस पोर्टल पर भी मिलान किया जाता है। इन प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद ही खाद ई-विकास पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग के लिए प्रदर्शित होता है, जिसके अनुसार डीएपी खाद लगभग एक सप्ताह में उपलब्ध होने की संभावना है।
कलेक्टर ने किसानों से अपील की है कि वे खाद की ऑनलाइन बुकिंग करते समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें और विशेष रूप से छोटे किसानों को तकनीकी सहायता और व्हाट्सऐप तथा सीएससी ऑपरेटरों की मदद से बुकिंग करने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही डीएपी के विकल्प के रूप में टीएसपी एवं एनपीके उर्वरकों के उपयोग पर भी विचार करने की अपील की गई है, ताकि किसानों को संतुलित एवं आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक मिल सके।