📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
धर्म
सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के पटाखों पर प्रतिबंध को कायम रखा
✍️ News18 Tamil
🗓 13 अक्टू. 2026, 12:36 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण व स्वास्थ्य कारणों से दिवाली के दौरान पटाखों पर राष्ट्रीय प्रतिबंध को बरकरार रखा।
नई दिल्ली — एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने आने वाले दिवाली उत्सव के दौरान पटाखों पर मौजूदा प्रतिबंध को बरकरार रखा, जिससे पहले के आदेशों को सुदृढ़ किया गया है जो पूरे देश में पायरोटेक्निक्स की बिक्री और उपयोग को सीमित करते हैं। कोर्ट ने कहा कि वायु प्रदूषण को रोकने, सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करने और त्योहार के दौरान शोर से उत्पन्न परेशानियों को कम करने के लिए यह प्रतिबंध आवश्यक है।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने पहले ही कड़े पटाखा प्रतिबंध लागू कर दिए हैं, और एक समान राष्ट्रीय नीति के बिना प्रवर्तन में असमानता बनी रहेगी। इस कारण राज्य सरकारों को अनुपालन की निगरानी, उल्लंघनों पर दंड और पर्यावरण‑अनुकूल उत्सव के वैकल्पिक तरीकों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया है।
उद्योग प्रतिनिधियों को याद दिलाया गया कि यह निर्णय स्वीकृत, कम‑उत्सर्जन वाले फायरक्रैकर्स के उत्पादन को पूरी तरह से रोकता नहीं है, परन्तु प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय त्योहार से पहले प्रवर्तन रणनीतियों को आकार देगा, जो 31 अक्टूबर से शुरू होगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सांस्कृतिक परम्पराओं और पर्यावरणीय आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है, और भविष्य में अन्य त्यौहारों के नियमों को भी प्रभावित कर सकता है।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने पहले ही कड़े पटाखा प्रतिबंध लागू कर दिए हैं, और एक समान राष्ट्रीय नीति के बिना प्रवर्तन में असमानता बनी रहेगी। इस कारण राज्य सरकारों को अनुपालन की निगरानी, उल्लंघनों पर दंड और पर्यावरण‑अनुकूल उत्सव के वैकल्पिक तरीकों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया है।
उद्योग प्रतिनिधियों को याद दिलाया गया कि यह निर्णय स्वीकृत, कम‑उत्सर्जन वाले फायरक्रैकर्स के उत्पादन को पूरी तरह से रोकता नहीं है, परन्तु प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय त्योहार से पहले प्रवर्तन रणनीतियों को आकार देगा, जो 31 अक्टूबर से शुरू होगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सांस्कृतिक परम्पराओं और पर्यावरणीय आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है, और भविष्य में अन्य त्यौहारों के नियमों को भी प्रभावित कर सकता है।