📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Arifin Sunarwan
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट: सिबल ने केंद्र के निर्णय पर सवाल उठाया, झारखंड के डीजीपी नियुक्ति नियमों पर
✍️ ThePrint
🗓 09 अक्टू. 2026, 02:37 PM
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सुप्रीम कोर्ट में, पूर्व संघीय कानून मंत्री अजय एम. सिबल ने केंद्र सरकार के झारखंड के डीजीपी नियुक्ति नियमों को अलग करने के निर्णय पर सवाल उठाया।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व संघीय कानून मंत्री अजय एम. सिबल द्वारा दायर याचिका सुनी, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार के झारखंड को डीजीपी नियुक्ति नियमों में अलग करने के निर्णय पर सवाल उठाया। याचिका के अनुसार, यह बदलाव भेदभावपूर्ण है और राज्यों के बीच समान व्यवहार के सिद्धांत का उल्लंघन करता है।
मंत्रालय गृह मामलों द्वारा पेश किए गए संशोधित नियमों के तहत, यदि किसी राज्य सरकार ने अभी तक उम्मीदवार का नामांकन नहीं किया है, तो केंद्र सरकार डीजीपी की नियुक्ति कर सकती है। आलोचकों का कहना है कि झारखंड ही एकमात्र राज्य है जिसे इस प्रावधान से प्रभावित किया गया है, जिससे केंद्र की अनियमित हस्तक्षेप की चिंता बढ़ती है।
सिबल ने तर्क दिया कि यह कदम राज्य पुलिस बलों की स्वायत्तता को कमजोर करता है और पुलिस नियुक्तियों को नियंत्रित करने वाले संविधानिक ढांचे का उल्लंघन करता है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि केंद्र के पास झारखंड को अलग करने का वैध आधार है या नहीं, इसकी जांच करे और सुनिश्चित करे कि यह नियम भविष्य में किसी भी मनमाने केंद्रीय हस्तक्षेप के लिए मिसाल न बने।
अदालत ने अभी तक याचिका पर निर्णय नहीं लिया है। इस मुद्दे पर सुनवाई आने वाले हफ्तों में होने की उम्मीद है, जिससे यह स्पष्ट हो सकता है कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच पुलिस नियुक्तियों पर कैसे बातचीत होनी चाहिए।
मंत्रालय गृह मामलों द्वारा पेश किए गए संशोधित नियमों के तहत, यदि किसी राज्य सरकार ने अभी तक उम्मीदवार का नामांकन नहीं किया है, तो केंद्र सरकार डीजीपी की नियुक्ति कर सकती है। आलोचकों का कहना है कि झारखंड ही एकमात्र राज्य है जिसे इस प्रावधान से प्रभावित किया गया है, जिससे केंद्र की अनियमित हस्तक्षेप की चिंता बढ़ती है।
सिबल ने तर्क दिया कि यह कदम राज्य पुलिस बलों की स्वायत्तता को कमजोर करता है और पुलिस नियुक्तियों को नियंत्रित करने वाले संविधानिक ढांचे का उल्लंघन करता है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि केंद्र के पास झारखंड को अलग करने का वैध आधार है या नहीं, इसकी जांच करे और सुनिश्चित करे कि यह नियम भविष्य में किसी भी मनमाने केंद्रीय हस्तक्षेप के लिए मिसाल न बने।
अदालत ने अभी तक याचिका पर निर्णय नहीं लिया है। इस मुद्दे पर सुनवाई आने वाले हफ्तों में होने की उम्मीद है, जिससे यह स्पष्ट हो सकता है कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच पुलिस नियुक्तियों पर कैसे बातचीत होनी चाहिए।