📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Diliff
अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, धारा 498ए में केवल दहेज नहीं, कोई भी अवैध संपत्ति की मांग शामिल
✍️ Live Law
🗓 26 अग. 2026, 06:37 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आईपीसी की धारा 498ए में दहेज की मांग अनिवार्य नहीं, किसी भी अवैध संपत्ति या मूल्यवान वस्तु की मांग को इस धारा में शामिल किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने धारा 498ए के दायरे को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि यह प्रावधान केवल दहेज की मांग तक सीमित नहीं है। न्यायालय ने बताया कि यह धारा पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा की गई किसी भी अवैध संपत्ति, धन या मूल्यवान वस्तु की मांग को भी दुरुपयोग के रूप में देखती है।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह स्पष्टिकरण मूल उद्देश्य—विवाहित महिलाओं को आर्थिक शोषण से बचाना—के अनुरूप है, चाहे मांग दहेज के रूप में ही क्यों न हो। अब दहेज की मांग का अस्तित्व धारा 498ए के लागू होने के लिए अनिवार्य नहीं रहेगा।
इस फैसले से वर्तमान और भविष्य में धारा 498ए के तहत चल रही या नई अभियोजन प्रक्रियाओं पर असर पड़ेगा, क्योंकि पुलिस अब व्यापक प्रकार की जबरन मांगों को अपराध मान सकती है। न्यायालय ने संकीर्ण व्याख्याओं को रोकते हुए इस कानून की सुरक्षा शक्ति को सुदृढ़ किया है।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह स्पष्टिकरण मूल उद्देश्य—विवाहित महिलाओं को आर्थिक शोषण से बचाना—के अनुरूप है, चाहे मांग दहेज के रूप में ही क्यों न हो। अब दहेज की मांग का अस्तित्व धारा 498ए के लागू होने के लिए अनिवार्य नहीं रहेगा।
इस फैसले से वर्तमान और भविष्य में धारा 498ए के तहत चल रही या नई अभियोजन प्रक्रियाओं पर असर पड़ेगा, क्योंकि पुलिस अब व्यापक प्रकार की जबरन मांगों को अपराध मान सकती है। न्यायालय ने संकीर्ण व्याख्याओं को रोकते हुए इस कानून की सुरक्षा शक्ति को सुदृढ़ किया है।