📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Diliff
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सार्वजनिक उद्देश्य के लिए ज़मीन अधिग्रहण वैध, चाहे निजी को लाभ हो
✍️ Live Law
🗓 30 अक्टू. 2026, 04:09 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सार्वजनिक उद्देश्य के लिए ज़मीन अधिग्रहण वैध है, भले ही निजी पक्ष को सहायक लाभ मिले, जिससे सार्वजनिक‑उद्देश्य मानदंड की सीमा स्पष्ट हुई।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने ज़मीन अधिग्रहण के संवैधानिक मानदंड की समीक्षा की और यह स्पष्ट किया कि "सार्वजनिक उद्देश्य" तभी रद्द नहीं होता जब निजी इकाई को सहायक लाभ मिलता है।
न्यायालय ने कहा कि यदि भूमि अधिग्रहण का मुख्य लक्ष्य सार्वजनिक आवश्यकता—जैसे बुनियादी ढांचा, उपयोगिताएँ या सामाजिक परियोजनाएँ—है, तो निजी पक्ष को मिलने वाला अतिरिक्त लाभ सार्वजनिक‑उद्देश्य परीक्षण को नकारता नहीं है। यह दृष्टिकोण पूर्व के निर्णयों के साथ मेल खाता है, जहाँ मुख्य उद्देश्य और द्वितीयक लाभ को अलग किया गया है।
कानूनी विश्लेषकों ने बताया कि इस फैसले से सरकारों और विकासकों को अधिक स्पष्टता मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें यह डर नहीं रहेगा कि निजी लाभ के कारण अधिग्रहण अवैध माना जाएगा। फिर भी उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय उचित मुआवजा या प्रक्रिया संबंधी सुरक्षा को नजरअंदाज करने की अनुमति नहीं देता।
यह निर्णय देश भर में लंबित कई ज़मीन‑अधिग्रहण मामलों पर असर डालने की संभावना रखता है, विशेषकर बड़े सार्वजनिक‑निजी साझेदारी परियोजनाओं में, जहाँ सार्वजनिक हित को प्रमुख माना जाएगा।
न्यायालय ने कहा कि यदि भूमि अधिग्रहण का मुख्य लक्ष्य सार्वजनिक आवश्यकता—जैसे बुनियादी ढांचा, उपयोगिताएँ या सामाजिक परियोजनाएँ—है, तो निजी पक्ष को मिलने वाला अतिरिक्त लाभ सार्वजनिक‑उद्देश्य परीक्षण को नकारता नहीं है। यह दृष्टिकोण पूर्व के निर्णयों के साथ मेल खाता है, जहाँ मुख्य उद्देश्य और द्वितीयक लाभ को अलग किया गया है।
कानूनी विश्लेषकों ने बताया कि इस फैसले से सरकारों और विकासकों को अधिक स्पष्टता मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें यह डर नहीं रहेगा कि निजी लाभ के कारण अधिग्रहण अवैध माना जाएगा। फिर भी उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय उचित मुआवजा या प्रक्रिया संबंधी सुरक्षा को नजरअंदाज करने की अनुमति नहीं देता।
यह निर्णय देश भर में लंबित कई ज़मीन‑अधिग्रहण मामलों पर असर डालने की संभावना रखता है, विशेषकर बड़े सार्वजनिक‑निजी साझेदारी परियोजनाओं में, जहाँ सार्वजनिक हित को प्रमुख माना जाएगा।