📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Diliff
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सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक उत्तराधिकार विवाद में सौतेली माँ के पक्ष में फैसला दिया
✍️ Livemint
🗓 07 अक्टू. 2026, 03:32 AM
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सौतेली माँ के उत्तराधिकार के हक को मान्यता दी, कर्नाटक के बेटे के सम्पूर्ण संपत्ति के दावे को खारिज किया।
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक लंबी चल रही उत्तराधिकार मामले में सौतेली माँ को मृत पति की संपत्ति का हक मानते हुए निर्णायक फैसला सुनाया। यह निर्णय तब आया जब कर्नाटक के एक निवासी ने अपने पिता की सम्पूर्ण संपत्ति का दावा करने के लिए याचिका दायर की, यह तर्क देते हुए कि सौतेली माँ को कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
अदालत ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत उत्तराधिकार कानूनों और वैवाहिक दस्तावेजों की जांच की और पाया कि सौतेली माँ का दावा वैध है। परिणामस्वरूप, बेटे का सम्पूर्ण संपत्ति का दावा खारिज कर दिया गया और संपत्ति को कोर्ट के आदेशानुसार बाँटा जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला उत्तराधिकार मामलों में सौतेले माता‑पिता के अधिकारों को सुदृढ़ करता है और समान विवादों के लिए एक मिसाल स्थापित करता है। यह निर्णय स्पष्ट उत्तराधिकार योजना के महत्व को भी उजागर करता है, जिससे दीर्घकालिक मुकदमों से बचा जा सके।
अदालत ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत उत्तराधिकार कानूनों और वैवाहिक दस्तावेजों की जांच की और पाया कि सौतेली माँ का दावा वैध है। परिणामस्वरूप, बेटे का सम्पूर्ण संपत्ति का दावा खारिज कर दिया गया और संपत्ति को कोर्ट के आदेशानुसार बाँटा जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला उत्तराधिकार मामलों में सौतेले माता‑पिता के अधिकारों को सुदृढ़ करता है और समान विवादों के लिए एक मिसाल स्थापित करता है। यह निर्णय स्पष्ट उत्तराधिकार योजना के महत्व को भी उजागर करता है, जिससे दीर्घकालिक मुकदमों से बचा जा सके।