📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
देश
सुप्रीम कोर्ट: वाहन आवाजाही से अधिक महत्वपूर्ण हैं पैदल चलने वालों के अधिकार
✍️ UdaipurTimes.com
🗓 21 जून 2026, 10:31 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पैदल चलने की स्वतंत्रता को मोटर वाहनों की आवाजाही से अधिक महत्व दिया जाना चाहिए। यह निर्णय शहरी नियोजन और सार्वजनिक स्थानों में पैदल चलने वालों के अधिकारों पर जोर देता है।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पैदल चलने वालों के अधिकारों के सर्वोपरि महत्व को रेखांकित किया है, यह दावा करते हुए कि चलने की स्वतंत्रता को मोटर वाहनों की आवाजाही से अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शीर्ष अदालत की यह महत्वपूर्ण टिप्पणी शहरी बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक स्थानों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव पर प्रकाश डालती है।
इस निर्णय का तात्पर्य यह है कि योजना और विकास में पैदल चलने वालों की जरूरतों को प्राथमिक चिंता के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। इससे ऐसी नीतियां और बुनियादी ढांचा डिजाइन बन सकते हैं जो पैदल चलने के लिए अधिक अनुकूल हों, जैसे कि बेहतर फुटपाथ, सुरक्षित क्रॉसिंग और पैदल चलने वालों की अधिक आवाजाही वाले क्षेत्रों में वाहनों की भीड़ को कम करना।
हालांकि मामले का विशिष्ट संदर्भ प्रदान की गई जानकारी में विस्तृत नहीं था, सर्वोच्च न्यायालय का रुख अधिक जन-केंद्रित शहर बनाने की दिशा में एक स्पष्ट निर्देश है। यह इस बात का पुनर्मूल्यांकन करने की वकालत करता है कि शहरी वातावरण कैसे डिजाइन किए जाते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि पैदल चलने के मौलिक अधिकार से वाहन यातायात के प्रभुत्व से समझौता न हो।
इस निर्णय का तात्पर्य यह है कि योजना और विकास में पैदल चलने वालों की जरूरतों को प्राथमिक चिंता के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। इससे ऐसी नीतियां और बुनियादी ढांचा डिजाइन बन सकते हैं जो पैदल चलने के लिए अधिक अनुकूल हों, जैसे कि बेहतर फुटपाथ, सुरक्षित क्रॉसिंग और पैदल चलने वालों की अधिक आवाजाही वाले क्षेत्रों में वाहनों की भीड़ को कम करना।
हालांकि मामले का विशिष्ट संदर्भ प्रदान की गई जानकारी में विस्तृत नहीं था, सर्वोच्च न्यायालय का रुख अधिक जन-केंद्रित शहर बनाने की दिशा में एक स्पष्ट निर्देश है। यह इस बात का पुनर्मूल्यांकन करने की वकालत करता है कि शहरी वातावरण कैसे डिजाइन किए जाते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि पैदल चलने के मौलिक अधिकार से वाहन यातायात के प्रभुत्व से समझौता न हो।