📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Perumalnadar
स्वास्थ्य
वीडियो की लत से युवा की नींद व मानसिक स्वास्थ्य पर असर, अध्ययन से पता चला
✍️ Amar Ujala · Punjab
🗓 12 अक्टू. 2026, 08:17 AM
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एक नवीन अध्ययन के अनुसार, लगातार वीडियो देखने से भारतीय युवाओं की नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
एक प्रमुख भारतीय विश्वविद्यालय की शोध टीम ने 15‑30 वर्ष की आयु के 2,000 से अधिक युवा प्रतिभागियों पर सर्वेक्षण किया। उन्होंने दैनिक वीडियो‑स्ट्रीमिंग के औसत समय को दर्ज किया, जिसमें छोटे क्लिप से लेकर पूर्ण लंबाई की फ़िल्में शामिल थीं। अध्ययन ने अधिक स्क्रीन‑टाइम को देर से सोने, कुल नींद की अवधि घटने और चिंता व उदासी की शिकायतों से जोड़ा।
आंकड़ों से पता चला कि तीन घंटे से अधिक वीडियो देखने वाले युवाओं में अनिद्रा के लक्षण दो गुना अधिक देखे गए, जबकि एक घंटे से कम उपयोग करने वालों में ये लक्षण कम थे। मानसिक‑स्वास्थ्य प्रश्नावली ने भी भारी दर्शकों में तनाव स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शायी।
शोधकर्ता चेतावनी देते हैं कि एल्गोरिद्म‑आधारित सामग्री उपयोगकर्ताओं को देर रात तक व्यस्त रखती है, जिससे सर्केडियन रिदम बाधित होता है। वे स्क्रीन‑टाइम सीमित करने, ब्लू‑लाइट फ़िल्टर उपयोग करने और ऑफ़लाइन गतिविधियों को बढ़ावा देने की सलाह देते हैं ताकि स्वस्थ नींद पैटर्न बहाल हो सके।
इन परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल मनोरंजन लोकप्रिय है, पर यदि अनुचित रूप से उपयोग किया जाए तो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। स्वास्थ्य प्राधिकरणों से अनुरोध है कि युवा कल्याण कार्यक्रमों में मीडिया‑उपयोग दिशानिर्देश शामिल किए जाएँ।
आंकड़ों से पता चला कि तीन घंटे से अधिक वीडियो देखने वाले युवाओं में अनिद्रा के लक्षण दो गुना अधिक देखे गए, जबकि एक घंटे से कम उपयोग करने वालों में ये लक्षण कम थे। मानसिक‑स्वास्थ्य प्रश्नावली ने भी भारी दर्शकों में तनाव स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शायी।
शोधकर्ता चेतावनी देते हैं कि एल्गोरिद्म‑आधारित सामग्री उपयोगकर्ताओं को देर रात तक व्यस्त रखती है, जिससे सर्केडियन रिदम बाधित होता है। वे स्क्रीन‑टाइम सीमित करने, ब्लू‑लाइट फ़िल्टर उपयोग करने और ऑफ़लाइन गतिविधियों को बढ़ावा देने की सलाह देते हैं ताकि स्वस्थ नींद पैटर्न बहाल हो सके।
इन परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल मनोरंजन लोकप्रिय है, पर यदि अनुचित रूप से उपयोग किया जाए तो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। स्वास्थ्य प्राधिकरणों से अनुरोध है कि युवा कल्याण कार्यक्रमों में मीडिया‑उपयोग दिशानिर्देश शामिल किए जाएँ।