🔥 ट्रेंडिंग तालीम आलम ने अपने आवास पर की पत्रकार व... फरीदाबाद में शराब के आहते और गोदाम में... હિંમતનગર: લગ્નના 4 મહિનામાં પત્નીના શં... सुप्रीम कोर्ट ने बिहार‑झारखंड के पात्र... झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य को मानवाधिका... झारखंड सरकार ने दुर्गा पूजा के लिए कड़...
29 सित. 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
राज्य महिला आयोग को कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर बाध्यकारी आदेश देने से रोक
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / President's Secretariat
नौकरी

राज्य महिला आयोग को कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर बाध्यकारी आदेश देने से रोक

✍️ Live Law 🗓 26 अग. 2026, 07:03 AM 👁 39
शेयर करें: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

एक हालिया न्यायिक निर्णय ने स्पष्ट किया कि राज्य महिला आयोग को सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तों को बदलने वाले बाध्यकारी आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि राज्य महिला आयोग कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर बाध्यकारी निर्देश नहीं दे सकते। यह निर्णय एक याचिका के बाद आया, जिसमें आयोग द्वारा कर्मचारियों की प्रोन्नति और पदस्थापना से संबंधित नीति परिवर्तन लागू करने की कोशिश को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने कहा कि महिला अधिकारों की रक्षा आयोग का मुख्य कार्य है, परन्तु सेवा शर्तों में बदलाव करने का वैधानिक अधिकार केवल राज्य सरकार और प्रशासनिक सेवाओं के पास है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला वैधानिक निकायों और कार्यकारी शाखा के बीच अधिकारों के विभाजन को सुदृढ़ करता है। यह निर्णय आयोग की लिंग-आधारित भेदभाव की शिकायतों की जांच करने की भूमिका को नहीं घटाता, परन्तु रोजगार अनुबंधों को प्रभावित करने वाले प्रशासनिक आदेश जारी करने की उसकी क्षमता को सीमित करता है।

यह राय भारत के अन्य राज्य आयोगों के लिए मार्गदर्शक होगी, जिससे वे यदि सेवा-संबंधी मामलों में अपना अधिकार क्षेत्र बढ़ाना चाहते हैं तो विधायी संशोधन की मांग कर सकते हैं। इस बीच, सरकार के विभागों को प्रोन्नति, स्थानांतरण और अन्य सेवा मामलों को स्थापित प्रशासनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ही संभालने की सलाह दी गई है।
📲Get App