📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Yoghya
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मौसम
सिक्किम के 16 हिमनदी झीलों से ग्लेशियल बाढ़ का खतरा
✍️ thestatesman.com
🗓 05 सित. 2026, 12:18 AM
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वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि सिक्किम के 16 हिमनदी झीलें अचानक बाढ़ का कारण बन सकती हैं, जिससे नीचे बसे क्षेत्रों को खतरा है।
सिक्किम के ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में कुल सोलह हिमनदी झीलें स्थित हैं, जिन्हें विशेषज्ञों ने संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के स्रोत के रूप में चिन्हित किया है। अचानक जल निकासी के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार और पर्यावरण वैज्ञानिकों ने सतर्कता जारी की है।
GLOF तब होता है जब हिमनदी झील को धारण करने वाली प्राकृतिक बांध टूटती है, जिससे तेज़ी से बड़ी मात्रा में पानी घाटियों में बहता है। इस प्रकार की बाढ़ निचले गाँवों, सड़कों और पुलों को डुबो सकती है और लोगों की जान को खतरा पैदा कर सकती है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भारतीय रिमोट सेंसिंग संस्थान के साथ मिलकर उपग्रह चित्र और स्थल‑सेंसर के माध्यम से झीलों के स्तर की लगातार निगरानी शुरू की है। संभावित आपदा के समय लोगों को तुरंत चेतावनी देने के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणाली स्थापित की जा रही है।
हिमालय में बढ़ते तापमान से ग्लेशियरों का पिघलना तेज़ हो रहा है, जिससे इन झीलों का आकार और अस्थिरता बढ़ रही है। अधिकारियों ने इस खतरे को कम करने के लिए निरंतर निगरानी और स्थानीय समुदाय की तैयारी को आवश्यक बताया है।
जो क्षेत्र जोखिम में हैं, उन्हें आपातकालीन निकासी मार्गों की जानकारी रखनी चाहिए और किसी भी आपदा अभ्यास में सहयोग करना चाहिए।
GLOF तब होता है जब हिमनदी झील को धारण करने वाली प्राकृतिक बांध टूटती है, जिससे तेज़ी से बड़ी मात्रा में पानी घाटियों में बहता है। इस प्रकार की बाढ़ निचले गाँवों, सड़कों और पुलों को डुबो सकती है और लोगों की जान को खतरा पैदा कर सकती है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भारतीय रिमोट सेंसिंग संस्थान के साथ मिलकर उपग्रह चित्र और स्थल‑सेंसर के माध्यम से झीलों के स्तर की लगातार निगरानी शुरू की है। संभावित आपदा के समय लोगों को तुरंत चेतावनी देने के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणाली स्थापित की जा रही है।
हिमालय में बढ़ते तापमान से ग्लेशियरों का पिघलना तेज़ हो रहा है, जिससे इन झीलों का आकार और अस्थिरता बढ़ रही है। अधिकारियों ने इस खतरे को कम करने के लिए निरंतर निगरानी और स्थानीय समुदाय की तैयारी को आवश्यक बताया है।
जो क्षेत्र जोखिम में हैं, उन्हें आपातकालीन निकासी मार्गों की जानकारी रखनी चाहिए और किसी भी आपदा अभ्यास में सहयोग करना चाहिए।