📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / John Salmon
अपराध
बाड़मेर पावर सबस्टेशन में केबल चोरी, 324.8 किग्रा एल्युमिनियम बरामद, छह गिरफ्तार
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 08 अक्टू. 2026, 02:31 PM
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बाड़मेर के सोखरू गांव स्थित पावर ग्रिड सबस्टेशन से रात में हुई केबल चोरी में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया, 324.8 किलोग्राम एल्युमिनियम तार बरामद किए और बिना नंबर की बोलेरो कैंपर व पिकअप जब्त की।
राजस्थान के बाड़मेर जिले के सोखरू गांव स्थित निर्माणाधीन पावर ग्रिड सबस्टेशन से 26 सितंबर की रात केबल चोरी की घटना सामने आई है। चोरों ने बिना तांबे के एल्युमिनियम तारों को निशाना बनाते हुए कुल 324.8 किलोग्राम तार निकाल ली।
पुलिस ने तेज़ी से जांच कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से बिना नंबर की बोलेरो कैंपर तथा पिकअप वाहन जब्त किया, जिन्हें चोरी किए गए माल के परिवहन के लिए इस्तेमाल किया गया माना जा रहा है।
बरामद किए गए एल्युमिनियम को सबस्टेशन के काम में पुनः उपयोग किया जाएगा, जिससे परियोजना में देरी को रोका जा सकेगा। साथ ही, इस चोरी के पीछे बड़े नेटवर्क की संभावना को देखते हुए व्यापक जांच चल रही है।
पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे निर्माण स्थलों के आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें, क्योंकि ऐसी चोरी न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है बल्कि आवश्यक विद्युत बुनियादी ढांचे की समय पर पूर्ति को भी खतरे में डालती है।
यह मामला राजस्थान में सार्वजनिक कार्यों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उजागर करता है, जिससे भविष्य में ऐसे साइटों पर कड़ी निगरानी और निगरानी उपायों की मांग बढ़ रही है।
पुलिस ने तेज़ी से जांच कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से बिना नंबर की बोलेरो कैंपर तथा पिकअप वाहन जब्त किया, जिन्हें चोरी किए गए माल के परिवहन के लिए इस्तेमाल किया गया माना जा रहा है।
बरामद किए गए एल्युमिनियम को सबस्टेशन के काम में पुनः उपयोग किया जाएगा, जिससे परियोजना में देरी को रोका जा सकेगा। साथ ही, इस चोरी के पीछे बड़े नेटवर्क की संभावना को देखते हुए व्यापक जांच चल रही है।
पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे निर्माण स्थलों के आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें, क्योंकि ऐसी चोरी न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है बल्कि आवश्यक विद्युत बुनियादी ढांचे की समय पर पूर्ति को भी खतरे में डालती है।
यह मामला राजस्थान में सार्वजनिक कार्यों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उजागर करता है, जिससे भविष्य में ऐसे साइटों पर कड़ी निगरानी और निगरानी उपायों की मांग बढ़ रही है।