📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bollywood Hungama
मनोरंजन
श्रेया घोषाल ने गीतों को ठुकराया, संगीत उद्योग को 'बहुत पुरुषप्रधान' कहा
✍️ The Times of India
🗓 06 सित. 2026, 04:27 AM
👁 31
प्रसिद्ध प्लेबैक गायिका श्रेया घोषाल ने बताया कि वह अक्सर गीतों को ठुकरा देती हैं और संगीत उद्योग को बहुत पुरुषप्रधान मानती हैं।
प्रसिद्ध प्लेबैक गायिका श्रेया घोषाल ने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ एक साक्षात्कार में अपने गीत चयन के बारे में खुलकर कहा। वह बताती हैं कि वह अक्सर ऐसे प्रोजेक्ट्स को ठुकरा देती हैं जो उनकी कलात्मक प्राथमिकताओं से मेल नहीं खाते।
गायिका ने बताया कि गीतों को न मानना एक सोच-समझ कर किया गया फैसला है, जिससे वह अपनी गुणवत्ता और व्यक्तिगत प्रासंगिकता बनाए रखती हैं, न कि अवसरों की कमी के कारण। वह उन रचनाओं को प्राथमिकता देती हैं जो उनके स्वर और फिल्म की कथा के साथ तालमेल रखते हैं।
श्रेया ने भारतीय संगीत उद्योग को 'बहुत पुरुषप्रधान' कहा, यह इंगित करते हुए कि संगीतकार, गीतकार और प्रोड्यूसर जैसे प्रमुख पदों पर पुरुषों का दबदबा है, जिससे महिला कलाकारों की विविधता और प्रतिनिधित्व सीमित रहता है।
उनकी यह टिप्पणी मनोरंजन क्षेत्र में लिंग समानता पर चल रही बहस के बीच आई है, और वह आशा करती हैं कि इस मुद्दे को उजागर करने से उद्योग में अधिक समावेशी प्रथाएँ अपनाई जाएँगी।
गायिका ने बताया कि गीतों को न मानना एक सोच-समझ कर किया गया फैसला है, जिससे वह अपनी गुणवत्ता और व्यक्तिगत प्रासंगिकता बनाए रखती हैं, न कि अवसरों की कमी के कारण। वह उन रचनाओं को प्राथमिकता देती हैं जो उनके स्वर और फिल्म की कथा के साथ तालमेल रखते हैं।
श्रेया ने भारतीय संगीत उद्योग को 'बहुत पुरुषप्रधान' कहा, यह इंगित करते हुए कि संगीतकार, गीतकार और प्रोड्यूसर जैसे प्रमुख पदों पर पुरुषों का दबदबा है, जिससे महिला कलाकारों की विविधता और प्रतिनिधित्व सीमित रहता है।
उनकी यह टिप्पणी मनोरंजन क्षेत्र में लिंग समानता पर चल रही बहस के बीच आई है, और वह आशा करती हैं कि इस मुद्दे को उजागर करने से उद्योग में अधिक समावेशी प्रथाएँ अपनाई जाएँगी।